प्रदेश के 109 साल पुराने चिकित्सा संस्थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के चिकित्सकों ने शनिवार को पहला गुर्दा प्रत्यारोपण कर एक और उपलब्धि हासिल कर ली।
इस मुकाम तक पहुंचने के लिए केजीएमयू के चिकित्सक कई महीनों से कवायद कर रहे थे। शनिवार को करीब छह घंटे की सर्जरी के बाद बहन की किडनी भाई को प्रत्यारोपित की गई।
मरीज और उसकी बहन चिकित्सकों की निगरानी में हैं। अमेठी निवासी खुशीराम (28) के दोनों गुर्दे लगभग डेढ़ साल पहले खराब हो गए थे।
केजीएमयू के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संत पांडेय की देखरेख में पहले दवाएं और फिर डायलिसिस के सहारे उसके एक-एक दिन कट रहे थे।
खुशीराम को मिली खुशखबरी
इसी बीच केजीएमयू को अंग प्रत्यारोपण की इजाजत मिल गई। ऑर्गन ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंट के गुर्दा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. मनमीत के संपर्क में करीब चार महीने पहले खुशीराम आए।
इसके बाद उनके ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू की गई। सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि खुशीराम के पास ज्यादा पैसे नहीं थे। इसलिए वह हिचक रहे थे।
वीसी प्रो. रविकांत से दवाओं व अन्य मदद की झंडी मिलने पर खुशीराम और उनके परिवार को प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया। डॉ. मनमीत ने बताया कि वीसी ने एक लाख रुपये से अधिक दवाओं के मद में मंजूर किए।
मरीजों को मिलेगा फायदा
डॉ. मनमीत ने बताया कि केजीएमयू में गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू होने से मरीजों को फायदा मिलेगा। अभी तक सिर्फ एसजीपीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा है।
वहां हर साल 125 से अधिक गुर्दा प्रत्यारोपण हो रहे हैं। यहीं नहीं प्रत्यारोपण के लिए वहां कम से कम चार महीने की वेटिंग भी है।
केजीएमयू में गुर्दा प्रत्यारोपण से गरीबों को राहत मिलेगी। उनका पीजीआई से कम से कम 40 फीसदी कम खर्च में प्रत्यारोपण हो सकेगा।
डॉ. मनमीत ने बताया कि असाध्य रोगी फंड से बीपीएल मरीज का पूरी तरह नि:शुल्क ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पीजीआई में एक ट्रांसप्लांट में 3.5 से 4 लाख रुपये का खर्च आता है।
केजीएमयू में ये ढाई से तीन लाख रुपये ही होगा। अगर सरकार से मदद मिली तो ये खर्च मात्र डेढ़ लाख ही रह जाएगा।