रोबोटिक तकनीक से ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है। ओपेन तकनीक की अपेक्षा इसमें चीरे कम लगते हैं। प्रत्यारोपण के बाद मरीज को दर्द, संक्रमण और ब्लड की भी कम जरूरत होती है।
10 मरीजों से नहीं लिया जाएगा अतिरिक्त चार्ज
संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब तीन लाख रुपये लगते हैं। रोबोटिक ट्रांसप्लांट में एक लाख अतिरिक्त चार्ज पड़ता है। निजी संस्थानों में यह खर्च करीब 20 लाख आता है, लेकिन संस्थान में 10 मरीजों से रोबोटिक ट्रांसप्लांट चार्ज नहीं लिया जाएगा। एक मरीज का ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। अब नौ और मरीजों से शुल्क नहीं लिया जाएगा।