बदलते ट्रेंड के साथ खादी के कपड़ों में आए बदलाव के साथ ही प्रधानमंत्री के आह्वान का युवाओं पर जबरदस्त असर देखने को मिल रहा है।
यही वजह है कि अकेले हजरतगंज के खादी इम्पोरियम में गांधी जयंती पर ही 300 से अधिक लोग खरीददारी को आए, इनमें अधिकतर युवा थे।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देशवासियों से खादी के इस्तेमाल का आह्वान किया था।
हजरतगंज स्थित गांधी आश्रम के शोरूम खादी इंपोरियम के पदाधिकारी बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बातों का युवाओं पर असर देखने को मिल रहा है।
युवाओं को इसलिए भा रही खादी
पदाधिकारियों का कहना है कि कपड़ों में खादी की रेडीमेड शर्ट, कुर्ते-पायजामे, तौलिया व रुमाल युवाओं को खासा पसंद आ रहे हैं। ऐसे ही युवतियों को सलवार-सूट और दुपट्टे आकर्षित कर रहे हैं।
खादी आश्रम इकाइयों के महामंत्री बीबी पाण्डेय बताते हैं कि युवाओं का रुझान खादी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। पहला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को युवा बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं।
दूसरे, खादी में ट्रेंडी कपड़ों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पहले जहां सिर्फ खादी के कुर्ते व पायजामे ही मिलते थे। वहीं अब ट्राउजर्स, स्वेट शर्ट और हाइनेक जैसे ट्रेंडी कपड़े भी तैयार किए जा रहे हैं।
डिजाइनिंग पर है स्पेशल फोकस
इसके लिए निफ्ट जैसी संस्थाओं से डिजायनरों को हायर किया जा रहा है। चेक वाली शर्टों से लेकर ट्रेंडी कपड़ों की डिजाइनिंग पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
महामंत्री आगे बताते हैं कि युवाओं को ब्रांडेड कपड़ों की तुलना में खादी पसंद आने के पीछे कई कारण हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण है खादी का ब्रांडेड कपड़ों से सस्ता होना।
एक ब्रांडेड शर्ट जहां हजार से ढाई हजार रुपये की रेंज में मिलती है। वहीं खादी की बनी शर्ट की रेंज 350 रुपये से शुरू होती है।
इसके अलावा खादी अन्य ब्रांडों से अधिक मजबूत व टिकाऊ होती है। पहनने में शालीन व आत्मविश्वास जगाते हैं खादी के कपड़े।
विंटर कलेक्शन पर 30% छूट
खादी इम्पोरियम के आरएस यादव बताते हैं कि फिलहाल समर कलेक्शन के कपड़ों की बिक्री हो रही है। पहली नवंबर से विंटर कलेक्शन की ओपनिंग होगी।
सदरी, रजाई-गद्दे, स्वेटर, जैकेट, कोट, शॉल और ऊनी चादर की नई रेंज इम्पोरियम में मौजूद है। पहली नवंबर से 30 प्रतिशत छूट ग्राहकों को दी जाएगी।
लखनऊ में खादी आश्रम, हजरतगंज खादी इम्पोरियम, सहारागंज रोड खादी भवन, निशातगंज कोतवाली के पीछे खादी के कपड़े आसानी से उपलब्ध हैं।