लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में दिल के इलाज पर इंतजार का दर्द हावी है। कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में दिखाने से पहले मरीजों को ऑनलाइन पंजीकरण के लिए 20 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, ऑफलाइन पंजीकरण के लिए मरीज और उनके तीमारदारों को सुबह चार बजे से ही लाइन लगानी पड़ती है।
कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में इस समय 200 ऑनलाइन और 100 ऑफलाइन पंजीकरण वाले मरीज देखे जाते हैं। मौके पर सिफारिश करने वाले या फिर गंभीरता को देखते हुए 50 मरीज और देख लिए जाते हैं। इसके बावजूद यहां ऑनलाइन पंजीकरण के लिए 20 दिन की वेटिंग चल रही है। केजीएमयू में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज होने पर ही पंजीकरण की तारीख आवंटित हो जाती है। इसके चलते उन्हें पंजीकरण के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है, लेकिन नए मरीजों का इंतजार कायम है।
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सरकारी अस्पतालों में नहीं है दिल के इलाज की व्यवस्था
राजधानी में सरकारी क्षेत्र में केजीएमयू के साथ ही एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान में ही दिल के इलाज की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। किसी भी सरकारी अस्पताल में एंजियोप्लास्टी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से इन तीनों संस्थानों पर मरीजों का काफी दबाव है।
क्षमता दोगुनी होने के बावजूद कम नहीं हुई वेटिंग
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पिछले साल के मुकाबले बेड की संख्या करीब दोगुनी हो चुकी है। इस साल यहां आईसीयू बेड बढ़कर 180 हो चुके हैं। बीते साल यह संख्या 84 ही थी। उम्मीद थी कि कार्डियोलॉजी विभाग के नए 10 मंजिला भवन बनने के बाद हालत में सुधार होगा और ऑनलाइन वेटिंग में कमी आएगी। बीते साल भी ऑनलाइन पंजीकरण की वेटिंग 20 दिन थी। बेड दोगुनी होने के बावजूद वेटिंग में अंतर नहीं आया है।
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ऑफलाइन पंजीकरण से दी जा रही राहत
दिल के इलाज के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था के साथ ही ऑफलाइन पंजीकरण की भी व्यवस्था है। ऑनलाइन पंजीकरण न हो पाने पर ऑफलाइन परचे बनाकर मरीज को परामर्श दिया जाता है। पूरा प्रयास रहता है कि किसी भी जरूरतमंद मरीज को निराश लौटाया न जाए।
- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू