राजधानी के अन्य दो चिकित्सा संस्थान डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की इमरजेंसी और संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में शुरुआती 24 घंटे पूरी तरह से निशुल्क इलाज की व्यवस्था है। इसमें मुख्य दवाएं और सभी जांच शुल्क शामिल हैं।
शुरुआती इलाज ही ज्यादा महंगा
दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए शुरुआती इलाज काफी महंगा होता है। ट्रॉमा प्रोटोकॉल के मुताबिक, दुर्घटना में घायल होने वाले सभी मरीजों का सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे अनिवार्य रूप से किया जाता है। इन पर ही ठीक-ठाक खर्च हो जाता है। इसके बाद खून संबंधी जांच अलग से होती है। एक बार जांच होने पर इलाज की दिशा तय हो जाती है और महंगी जांच के बजाय बड़ा खर्च दवाओं का ही रहता है।
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में किसी भी दूसरे अस्पताल के मुकाबले मरीजों की संख्या बेहद ज्यादा रहती है। सभी मरीजों को निशुल्क दवाएं दी जाती हैं। निशुल्क इलाज में जांच भी शामिल करने के लिए नए सिरे से आकलन तैयार करना होगा। फिलहाल विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को पूरा इलाज निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।