बजट की कमी के चलते नेट की जांच किट का भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ब्लड ट्रांफ्यूजन विभाग कंपनी से ली जाने वाली किट का भुगतान नहीं कर पा रहा। उधार बढ़ने कारण नेशनल हेल्थ मिशन से मदद की गुहार की है।
मिशन ने बजट देने के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई। बजट देने के लिए संस्तुति तो मिल गई लेकिन उसे पूरा करने में कुछ महीने का समय लग जाएगा। बढ़ते उधार को कम करने के लिए ब्लड यूनिट का शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
जनरल वार्ड के मरीजों को 400 रुपये का एक यूनिट ब्लड मिल जाता है। अब इसका शुल्क बढ़ा कर 600 सौ रुपये किया जा रहा है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा का कहना है कि नेट की जांच किया हुआ ब्लड का शुल्क फि र भी कम है। उन्होंने बताया कि प्राईवेट वार्ड का शुल्क एक हजार रुपये तथा निजी अस्पतालों से आने वाले लोगों को दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है।
केजीएमयू में खून के दाम
जनरल मरीज के लिए एक यूनिट ब्लड का रेट - 400
प्राइवेट मरीजों के लिए शुल्क -1000
निजी अस्पतालों के रेट - 2000
केजीएमयू ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि ब्लड बैंक में रोजाना करीब 200 यूनिट ब्लड की खपत है। इसमें तीस प्रतिशत निजी अस्पताल के मरीज ले जाते हैं।
सिर्फ तीन जगह नेट जांच की सुविधा
डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया नेट जांच की सुविधा राजधानी में सिर्फ तीन संस्थानों में उपलब्ध है। इसमें केजीएमयू, पीजीआई व सहारा हॉस्पिटल है। निजी ब्लड बैंकों में कहीं पर यह सुविधा नहीं है। नेट की जांच से खून में मौजूद बीमारी आसानी से पकड़ में आती है। ऐसे में नेट जांच के बाद ही संक्रमणमुक्त खून मरीजों को ब्लड दिया जाता है।