50 साल की चंद्रज्योत को थायरायड कैंसर था। लगभग 15 साल से गले में बढ़ी हुई थायरायड ग्रंथि के कारण परेशान थी। कैंसर उसके गले की हड्डी (हंसली) के नीचे से होते हुए छाती की हड्डी के पीछे तक पहुंच चुका था। यहां तक कि ट्यूमर गले में स्थिति नोड्स (गिल्टियों) और खून को दिल तक पहुंचाने वाली मुख्य नसों के अंदर भी फैल गया था।
इससे चंद्रज्योत को सांस फूलने, दर्द और सूजन भी हो गई थी। लेकिन केजीएमयू के सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने उसकी सर्जरी कर इस पीड़ा से मुक्ति दिला दी। अब वो तेजी से स्वस्थ हो रही है।
केजीएमयू के सर्जरी विभाग के हेड प्रो. अभिनव अरुण सोनकर ने बताया कि आमतौर पर इसे घेंघा कहा जाता है लेकिन 10 फीसदी मरीज ऐसे भी होते हैं जिसमें ये कैंसर का रूप ले लेता है और गले से होते हुए नीचे छाती के अंदर तक फैल जाता है।
चंद्रज्योत का घेंघा भी इसी तरह कैंसर में बदलकर दिल तक खून पहुंचाने वाली मुख्य नस (सुपीरियर वेना कावा) के अंदर तक पहुंच गया था। इसकी वजह से उसे सांस फूलने, दर्द की शिकायत हो गई थी। शरीर के बाहर तो ट्यूमर दिखता ही था। अंदर भी कई अंगों तक कैंसर फैल गया था।