लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों कार्डियोलॉजी विभाग के नए भवन का उद्धाटन कराने के बावजूद केजीएमयू प्रशासन छह महीनों में 56 बेड पर भर्ती शुरू नहीं कर पाया है। नए भवन के बाद संस्थान में दिल के मरीजों के लिए भर्ती क्षमता 84 से 180 हो जानी थी। यहां अब भी 124 बेड पर ही भर्ती हो रही है।
सीएम ने 14 जुलाई को केजीएमयू में 105 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 10 मंजिला नए भवन का लोकार्पण किया था। इससे पहले यहां 84 बेड थे। नए भवन में कुल 96 बेड बढ़ने थे। इस तरह से 180 बेड पर भर्ती होनी चाहिए, लेकिन नए भवन में सिर्फ 40 बेड ही शुरू हो पाए। बचे 56 बेड में से 16 एचडीयू और 40 प्राइवेट वार्ड के हैं। इन पर अभी भी भर्ती शुरू नहीं हो पाई है।
दावा: चालू हैं सभी कैथलैब
नए भवन में दो कैथलैब भी हैं। तीन पुरानी कैथलैब को मिलाकर इनकी कुल संख्या पांच हो गई है। कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. ऋषि सेठी का दावा है कि सभी पांच कैथलैब शुरू हो चुकी हैं और मरीजों को सुविधा दी जा रही है।
ओपीडी में अब भी भीड़
केजीएमयू को भले ही नया भवन मिल गया है, लेकिन ओपीडी वाला स्थान अब भी बेहद सीमित है। इस वजह से यहां रोजाना घमासान और कहासुनी की स्थिति रहती है। ओपीडी में रोजाना 300 मरीज देखने की सीमा तय की गई है। इसकी वजह से मरीज सुबह चार बजे से ही लाइन में लग जाते हैं।
ओपीडी में दिखाने के लिए भी वेटिंग
केजीएमयू में कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में इस समय 200 ऑनलाइन और 100 ऑफलाइन पंजीकरण वाले मरीज देखे जाते हैं। मौके पर सिफारिश करने वाले या फिर मरीज की गंभीरता को देखते हुए 50 मरीज और देख लिए जाते हैं। इसके बावजूद यहां ऑनलाइन पंजीकरण के लिए 20 दिन की वेटिंग चल रही है। केजीएमयू में भर्ती के बाद डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को पंजीकरण की तारीख आवंटित की जा रही है। इसके चलते उनको पंजीकरण के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है, लेकिन नए मरीजों को समस्या हो रही है।
सरकारी अस्पतालों में नहीं दिल के इलाज की व्यवस्था
राजधानी में सरकारी क्षेत्र में केजीएमयू के साथ एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान में ही दिल के इलाज की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। किसी भी सरकारी अस्पताल में एंजियोप्लास्टी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से इन तीनों संस्थानों पर मरीजों का काफी दबाव है। प्रवक्ता प्रो केके सिंह का कहना है कि केजीएमयू में कार्डियोलॉजी विभाग के नए भवन के तीन मंजिल अभी संचालित नहीं हो पाए हैं। इनमें से एक पर प्राइवेट वार्ड, एक पर एचडीयू और एक पर फैकल्टी के कमरे हैं। नए भवन के लिए मानव संसाधन की व्यवस्था शासन को करनी है। इसके लिए केजीएमयू प्रशासन की ओर से पत्र भेजा जा चुका है। प्रयास किया जा रहा है आउटसोर्सिंग कर्मियों के सहारे सभी बेड पर भर्ती सुनिश्चित की जाए।