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समिति गठित कर भूल जाता है केजीएमयू

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लखनऊ। केजीएमयू में कुलपति से लेकर कर्मचारी तक के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। ज्यादातर मामलों में केजीएमयू प्रशासन समिति गठित कर भूल जाता है। ऐसे में ज्यादातर मामले लंबे समय से अटके हैं, जबकि एक मामले में बिना अनुशासनिक समिति की बैठक बुलाए ही कार्रवाई करने की बात सामने आई है।
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केजीएमयू में शताब्दी अस्पताल में महिला कर्मचारी से छेड़खानी, एक विभागाध्यक्ष के खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस की शिकायत, कुलपति के खिलाफ प्रमोशन, नियुक्ति, खास लोगों को प्रति नियुक्ति देने संबंधी शिकायत, ट्रामा सेंटर में सुरक्षाकर्मियों द्वारा तीमारदार की पिटाई करने, रेजीडेंटों की परीक्षा में पर्चा आउट होने, सीनियर रेजीडेंटों की नियुक्ति में आरक्षण की अनदेखी करने सहित दर्जनभर से ज्यादा मामलों में जांच कमेटी गठित की गई। सभी मामलों में सप्ताहभर में रिपोर्ट देने की बात कही गई, लेकिन ज्यादातर मामलों को गुपचुप तरीके से निपटा दिया गया।
एक मामले में कार्रवाई, दूसरे पर पर्दा
केजीएमयू के विभिन्न मामलों में वर्ष 2011-12 में लेखा परीक्षा की ओर से आपत्ति लगी। इसमें बिंदु संख्या चार पर उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन को सिंगल विंडो कंप्यूटराइजेशन व ई गवर्नेंस के कार्य पूरा किए बिना ही भुगतान करने पर आपत्ति जताई गई थी। इसमें तीन वर्ग की गारंटी थी। कार्य होने से पहले ही एएमसी के रूप में 42 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसी तरह बिंदु संख्या पांच पर गैर सूचीबद्ध कंपनी से काम कराकर करीब 90 लाख के भुगतान का आरोप लगा। इन दोनों मामले में जांच कमेटी गठित की गई। बिंदु संख्या पांच वाले मामले में जांच की कार्यवाही पूरी कर ली गई, जबकि बिंदु संख्या चार में अभी तक जांच नहीं की गई है। खास बात यह है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में कुलसचिव कार्यालय द्वारा बताया गया है कि मामले में गठित अनुशासनिक समिति की कोई बैठक नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अनुशासनिक समिति की एक भी बैठक नहीं हुई तो फिर इस मामले में कार्रवाई कैसे की गई। फिलहाल इस मामले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है।
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कार्य परिषद के आधार पर कार्रवाई
जो भी समिति गठित की गई है, वह जांच कर रही है। निर्धारित समय पर जांच पूरी नहीं होने पर समय बढ़ाया जा सकता है। जहां तक आईटी सेल से जुड़े दोनों प्रकरण का मामला है तो इसमें कार्य परिषद के फैसले के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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- राजेश कुमार राय, कुलसचिव केजीएमयू
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