सवाल- चुनाव में जनता से जुड़े मुद्दे पीछे हो गए हैं। ध्रुवीकरण मुद्दा क्यों बन गया?
जवाब- पहले की सरकारों के समय विकास के नाम पर निकला पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता था। मोदी व योगी सरकार के समय वह पैसा विकास में लगा है। भाजपा तो विकास के नाम पर ही चुनाव लड़ना चाह रही है, लेकिन विपक्ष ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहा है।
सवाल- मायावती रामनवमी की बधाई दे रही हैं। राहुल-सोनिया भी मंदिर जा रहे हैं?
जवाब- बड़े-बड़े ऊंट पहाड़ के नीचे आ गए है। जिन्हें भगवान श्रीराम के नाम से परहेज रहता था, उन्हें रामनवमी की बधाई देने के लिए विवश होना पड़ा। जो मंदिर देखकर मुंह फेर लेते थे, वे मंदिरों में माथा टेककर अपने हिंदू होने का प्रमाण दे रहे हैं। जब श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर बनेगा तो ये सब कारसेवक बनकर जयकारा लगाएंगे।
सवाल- प्रियंका गांधी वाड्रा का कितना असर रहेगा?
जवाब- राहुल गांधी को अमेठी छोड़कर केरल भागना पड़ा। सोनिया गांधी, राहुल गांधी या प्रियंका जहां कहीं जाते हैं तो सेल्फी लेने वाले कार्यकर्ताओं तक उनका दायरा सिमट कर रह गया है। इसी से असर समझा जा सकता है।
सवाल- बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश को राजनीति में लाने की घोषणा की है, इसे किस रूप में देखते हैं?
जवाब- सपा, बसपा और कांग्रेस हमेशा से व्यक्ति और परिवार तक केंद्रित रही हैं। आकाश को राजनीति में लाने की घोषणा कोई आश्चर्य का विषय नहीं है। यह तो होना ही था।
सवाल- मैनपुरी, रायबरेली और आजमगढ़ में भाजपा ने जैसे उम्मीदवार उतारे, उससे लगता है कि पार्टी ने कुछ नेताओं की जीत का रास्ता खोल दिया है?
जवाब- मैनपुरी, आजमगढ़ और रायबरेली में भाजपा का उम्मीदवार कमजोर नहीं है। भाजपा जीतने के लिए चुनाव लड़ रही है। किसी को वॉकओवर नहीं दिया गया है।
सवाल- एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को मौका नहीं दिया है?
जवाब- हमने सर्वे के आधार पर जीतने वाले को टिकट दिया है। हिंदू-मुसलमान के आधार पर टिकट नहीं दिया है। विधानसभा चुनाव में भी टिकट नहीं दिया था, लेकिन मोहसिन रजा को मंत्री बनाया। लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया था, पर केंद्र सरकार में मुख्तार अब्बास नकवी को मंत्री बनाया है।