फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'पद्मावत' पर करणी सेना का बयान, भंसाली हमें वही फिल्म दिखाएं जो रिलीज करने जा रहे हैं

Mon, 22 Jan 2018 09:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

संजय लीला भंसाली के पत्र पर हिंदी फिल्म ‘पदमावत’ देखने के लिए राष्ट्रीय करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी राजी हो गए हैं। उन्होंने सोमवार को लखनऊ में एक प्रेस वार्ता करके कहा कि इसके लिए भंसाली तारीख तय करें और फिल्म का वहीं वर्जन उन्हें दिखाएं जो जनता को दिखाने जा रहे हैं।

विज्ञापन


वे चितौड़ के मध्यकालीन शासक रतन सिंह और रानी पदमावती के कुनबे की 37वीं पीढ़ी हैं, इसलिए उन्हें फिल्म देखने का अधिकार है। कालवी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की, जिसके बारे में कालवी ने कहा कि वे यूपी में फिल्म के प्रदर्शन रोकने में सरकार से सहयोग मांगने गए थे।

उन्होंने दावा किया कि सीएम ने करणी सेना द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे पर समर्थन जताया है, हालांकि कानूनी वजहों से फिल्म रोकने का पक्का आश्वासन उनकी ओर से नहीं मिला है। लोकेंद्र कालवी ने कहा कि सीएम योगी ने उनसे फिल्म में मौजूद कमियों के बारे में पूछा। इनमें 40 कमियां बताई गई हैं। जिनमें रानी का दरबार में घूमर नृत्य, खिलजी के हमाम में रहते हुए एक महिला के साथ अंतरंग होते हुए दृश्य में दीपिका की हमशक्ल को दिखाया जाना, आदि प्रमुख आपत्तियां सामने आई हैं।
विज्ञापन


28 जुलाई 2016 को खुद रणवीर सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि दीपिका के साथ दो अंतरंग सीन मिल जाएं तो वे कोई भी फिल्म करेंगे। हमारा मानना है कि इसके पीछे कोई न कोई बात छिपाई जा रही है। कालवी ने कहा कि अगर भंसाली फिल्म दिखाना चाह रहे हैं तो वे ‘प्री स्क्रीनिंग’ देखने के लिए तैयार हैं।

कानून व्यवस्था सरकार का काम, फिल्म रोकना हमारा
कालवी ने कहा कि वे भारत बंद नहीं करेंगे क्योंकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस होता है, उसका निरादर नहीं करेंगे। लेकिन फिल्म को रोक कर रहेंगे। इस दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो यह देखना सरकार का काम है। हमारा काम जनता कर्फ्यू लगाना है, करणी सेना यह करेगी। हम फिल्म हॉल वालों से भी बात कर रहे हैं, जनता और उन्हें तय करना है कि खिलजी के साथ रहना है या रतन सिंह के। इसे चुनावों से न जोड़ा जाए क्योंकि हर कुछ महीने में कहीं न कहीं चुनाव होते हैं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें