उन्होंने कहा कि सदियों से दलितों और पिछड़ों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से वंचित रखा गया है, आरक्षण उसी पाप का प्रायश्चित है। गरीब सवर्णों को आरक्षण देने में कोई एतराज नहीं होना चाहिए, पर हमारा हिस्सा बिल्कुल भी नहीं कटना चाहिए।
कल्याण सिंह ने कहा, एक बात सदैव याद रखना कि जो समाज राजनीति में पिछड़ जाता है, उसकी दो कौड़ी की इज्जत रह जाती है। इसलिए हर स्तर के चुनाव में टिकट मांगो। अगर टिकट न मिले तो एकसाथ बैठकर फैसला लो कि एक तरफ ही जाएंगे। फिर देखना हर राजनीतिक दल के नेता आपकी चौखट पर माथा टेकने आएंगे।
आरक्षित वर्ग के अफसरों की कम तैनाती के खिलाफ उठाओ आवाज
कल्याण ने कहा कि आप लोगों के बीच पुन: चेतना जगाना चाहता हूं कि ‘कोऊ नृप होऊ, हमहि का हानी’ वाला भाव छोड़ दो। रामराज्य में यह बात ठीक हो सकती है, पर आज नहीं। शिक्षा, संगठन और संघर्ष से ही वंचितों की तकदीर बदल सकती है। अपने अंदर यह भाव पैदा करो कि जिससे खुश हो, उस पर सबकुछ लुटा दो। जिससे नाराज हो, उसका बंटाधार कर दो।
कल्याण सिंह ने कहा कि उच्च पदों पर एससी-एसटी और ओबीसी अधिकारियों की संख्या बेहद कम है। इस तरफ सरकारों को भी ध्यान देने की जरूरत है। पूछो कि हमारे वर्ग के डीएम और यहां तक कि दरोगा भी कितने हैं। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी तैयार रहो।