दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी का कांग्रेस को समर्थन देने संबंधी बयान शनिवार को भी राजधानी में चर्चा का विषय बना रहा। सभी ने इसे तरजीह न दिए जाने की बात कही।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि मौलाना अहमद बुखारी पर सियासी बुखार चढ़ गया है।
वहीं मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि बुखारी सियासी हो गए हैं। ऑल इंडिया दलित मुस्लिम मोर्चा के सलाहउद्दीन शीबू ने कहा कि मौलाना की शान जामा मस्जिद की इमामत है, सियासत नहीं।
नागरिक शक्ति मंच के उपाध्यक्ष राजेश सिंह चौहान ने कहा कि धर्मगुरु किस हद तक चले जाएंगे, यह तय कर पाना अब मुश्किल हो चुका है।
उन्होंने अहमद बुखारी के बयान को मुसलमानों को गुमराह करने वाला बताते हुए कहा कि मुसलमानों को धर्म का चोला ओढ़कर गुमराह करने वाले उलमा को पहचान लेना होगा।
पूर्व सभासद आयशा त्यागी ने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए शाही इमाम देश के मुसलमानों का सौदा कर रहे हैं।
मोमिन अंसार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अकरम अंसारी ने भी बयान की निंदा करते हुए बुखारी को बिकाऊ बताया है।