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बिस्मिल ने जेल में लिखा था ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’, पढ़ें पूरा काकोरी कांड

Tue, 09 Aug 2016 07:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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काकोरी कांड - फोटो : amar ujala
जिस प्रकार अंग्रेज सरकार की पुलिस चौकी को जला दिए जाने के कारण गोरखपुर का चौरीचौरा स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में दर्ज है, ठीक उसी तरह, लखनऊ के निकट काकोरी का ट्रेन एक्शन भी हमेशा चर्चा में रहा है। इसके कारण रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्लाह खान और रोशन सिंह को फांसी की सजा मिली थी साथ ही कई क्रांतिकारियों को कारावास हुआ था।
 
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काकोरी कांड - फोटो : amar ujala
इस बार नौ अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन की 91वीं वर्षगांठ मनायी गई। लखनऊ से करीब 13 किलोमीटर दूर काकोरी में 1925 में क्रांतिकारियों को अपनी गतिविधियां चलाने के लिए धन की जरूरत पड़ी तो उन्होंने सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। इस संबंध में शाहजहांपुर में सात अगस्त 1925 को बैठक भी की गई, जिसमें चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, शचींद्रनाथ बख्शी, मन्मथनाथ गुप्त सहित कई क्रांतिकारी शामिल हुए। 
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काकोरी कांड - फोटो : demo pic
बैठक में तय हुआ कि सहारनपुर से लखनऊ आने वाली आठ डाउन पैसेंजर से रोजाना जाने वाले अंग्रेजों के खजाने को लूट लिया जाय। अगर सब कुछ ठीक रहा होता तो काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में आठ अगस्त की तिथि के साथ दर्ज होती, लेकिन आठ अगस्त को क्रांतिकारी इसमें असफल रहे थे। 

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काकोरी कांड - फोटो : demo pic
वे करीब 10 मिनट देर से वहां पहुंचे थे और उनके पहुंचने के पहले ही ट्रेन निकल चुकी थी।आठ अगस्त को असफल रहने के बाद नए सिरे से योजना बनाई गई और इसे नौ अगस्त को अंजाम दिया गया। नौ अगस्त 1925 को क्रांतिकारी काकोरी स्टेशन पहुंच गए और उसी ट्रेन पर सवार हो गए।
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काकोरी कांड - फोटो : demo pic
ट्रेन को जंजीर खींचकर रोक लिया गया और योजना के अनुसार क्रांतिकारी अपने-अपने कामों में लग गए। गार्ड को पेट के बल लिटा दिया गया। खजाने के संदूक को नीचे गिरा दिया गया। पटरी के दोनों तरफ पिस्तौल लेकर कई क्रांतिकारी पहरा देने लगे। उस ट्रेन में कई ऐसे लोग भी थे जिनके पास हथियार थे, लेकिन किसी ने क्रांतिकारियों के विरोध का साहस नहीं किया।
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काकोरी कांड - फोटो : demo pic
इस बीच, एक ट्रेन उधर से गुजरी तो  क्रांतिकारियों लगा कि अंग्रेजों ने सैनिक भेज दिए हैं, लेकिन वह ट्रेन धड़धड़ाते हुए गुजर गई। इस एक्शन में चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्लाह खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, शचींद्र नाथ बख्शी, केशव चक्रवर्ती, मुरारीलाल, मुकुंदीलाल, बनवारी लाल सहित कई क्रांतिकारी शामिल थे। 
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डेमो - फोटो : demo pic
इसमें जर्मनी माउजर पिस्तौल का प्रयोग किया गया था और मन्मथनाथ गुप्त की गलती से गोली चल गई थी, जिससे एक यात्री की मौत हो गई थी। क्रांतिकारियों ने जल्द खजाना लूट लिया। साढ़े चार हजार की रकम मिली।घटना के बाद अंग्रेज सरकार घबरा गई और वह क्रांतिकारियों के पीछे हाथ धोकर पड़ गई।

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डेमो - फोटो : demo pic
उन पर पांच हजार रुपये के इनाम घोषित किए गए और 40 क्रांतिकारी पकड़े गए, लेकिन आजाद फरार रहे और इलाहाबाद में घिर जाने पर शहीद हुए। बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान, रोशन सिंह और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा सुनाई गई।  शचींद्र नाथ सान्याल, मुकुंदी लाल, गोविद चरण, योगेशचंद्र चटर्जी और शचींद्र नाथ बख्शी को आजीवन कारावास की सजा हुई।
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काकोरी कांड - फोटो : demo pic
मन्मथनाथ गुप्त को 14 वर्ष तथा कई अन्य क्रांतिकारियों को तीन से 10 वर्ष तक की सजा हुई। लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को गोंडा जेल में तथा 19 दिसंबर को बिस्मिल को गोरखपुर जिला जेल, अशफाक उल्लाह खान को फैजाबाद जिला जेल और रोशन सिंह को इलाहाबाद के मलाका जेल में फांसी दी गई। जेल में बंद रहते हुए बिस्मिल ने मेरा रंग दे बसंती चोला गीत लिखा। 
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