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माया के अफसरों को मिली कठोर सजा!

Fri, 13 Feb 2015 09:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बसपा शासन में हुए करोड़ों के लैकफेड घोटाले के सात दोषियों को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार को सजा सुनाई। लैकफेड के प्रबंध निदेशक रहे ब्रह्म प्रकाश सिंह को 10 साल कठोर कारावास और 1.30 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा दी गई है।
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महाप्रबंधक रहे पंकज त्रिपाठी और मुख्य अभियंता गोविंद शरण श्रीवास्तव को 10-10 साल की जेल और 90-90 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

तीन इंजीनियरों दिनेश कुमार साहू को सात साल की जेल व 50 लाख का जुर्माने, अजय दोहरे को सात साल की जेल व 25 लाख का जुर्माने, संजय कुमार को पांच साल की जेल व पांच लाख रुपये जुर्माने और लेखाकार अनिल अग्रवाल को 3 साल की जेल व 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है।

विशेष न्यायाधीश लल्लू सिंह ने अपने 746 पन्नों के फैसले में दोषियों को सजा सुनाते वक्त कहा कि भ्रष्टाचार से विकास की परियोजनाएं बेअसर हो जाती हैं और देश प्रगति के रास्ते से भटक जाता है। जनता विभिन्न प्रकार के अभावों में जीने के लिए मजबूर हो जाती है।
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माया के मंत्री पहले ही हो चुके हैं बरी

न्यायाधीश ने कहा कि जिन लोक सेवकों पर विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन व संवारने का परम दायित्व होता है, अगर वही अपने दायित्व से विचलित होकर स्वार्थ के लिए काम करेंगे तो निश्चित तौर पर समाज व देश पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। सारे समाज का विकास रुक जाएगा।

कोई लोक सेवक अपने कर्तव्यों के निर्वहन में भ्रष्ट आचरण का सहारा लेता है तो उसे कठोरता से दंडित किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि नौ फरवरी को कोर्ट ने पूर्व मंत्रियों बाबूसिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह, रंगनाथ मिश्रा, चंद्र देवराम यादव, पूर्व आईएएस रामबोध मौर्या, पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधक दीपक दवे और पूर्व पीआरओ प्रवीण कुमार सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। बाकी को दोषी मानकर बृहस्पतिवार को सजा सुनाई।

किसको कितनी सजा

1. ब्रह्म प्रकाश सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेशक
- गबन व साजिश के लिए 10 साल कठोर कारावास और 50 लाख रुपये जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक साल के अतिरिक्त कारावास।

- धोखाधड़ी व साजिश के आरोप में 10 साल कठोर कारावास व 50 लाख जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष की और जेल।

- धोखाधड़ी व साजिश में 5 वर्ष कठोर कारावास व 20 लाख रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर 6 महीने की जेल और।

- धोखाधड़ी व साजिश के लिए 5 साल कारावास व 10 लाख जुर्माना। जुर्माना न जमा करने पर छह महीने की जेल।
- जाली दस्तावेज तैयार करने के लिए 1 साल कठोर कारावास।

कोर्ट कमेंट : घोटाला होता ही नहीं अगर कर्तव्य निभाते
कोर्ट ने कहा कि जब इंजीनियरों द्वारा अपराध किया जा रहा था, ब्रह्म प्रकाश सिंह लैकफेड के सर्वोच्च पद पर तैनात था। उसका एकमात्र दायित्व और परम कर्तव्य था कि लैकफेड की व्यवस्थाओं और प्रशासन को सुचारु रूप से चलाए। लेकिन सिंह ने अपने निचले अधिकारियों के साथ मिलकर षडयंत्र किया। बड़ी राशि का गबन होने दिया। सिंह ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया होता तो यह घोटाला होता ही नहीं।

निगरानी करनी थी, गबन कर दिया

पंकज त्रिपाठी, तत्कालीन महाप्रबंधक एवं 3. गोविंद शरण श्रीवास्तव, तत्कालीन मुख्य अभियंता

- गबन व साजिश के लिए 10 साल कठोर कारावास और 40 लाख रुपये जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 1 साल के अतिरिक्त कारावास।

- धोखाधड़ी व साजिश के आरोप में 10 साल कठोर कारावास व 40 लाख जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष की जेल।
- धोखाधड़ी व साजिश के आरोप में 5 वर्ष कठोर कारावास व 5 लाख रुपये का जुर्मान। जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने की और जेल।

- धोखाधड़ी व साजिश के लिए 5 साल कारावास व 5 लाख जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न जमा करने पर छह महीने की जेल होगी।

- जाली दस्तावेज तैयार करने के लिए 1 साल कठोर कारावास।

कोर्ट कमेंट: करोड़ों का नुकसान पहुंचाया
पंकज त्रिपाठी लैकफेड महाप्रबंधक वित्त एवं प्रशासक पद पर नियुक्त था। सामान्य प्रशासन के साथ साथ वित्तीय मामलों में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने का दायित्व उस पर था। लेकिन त्रिपाठी ने लैकफेड के इतने महत्वपूर्ण पद पर होते हुए भी इंजीनियरों के साथ मिलकर साजिश की और लैकफेड को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।

कोर्ट कमेंट : निगरानी करनी थी, गबन कर दिया
‘गोविंद शरण मुख्य अभियंता था और उसे इंजीनियरों को दिए थन की निगरानी करनी थी। उसे देखना था कि जो धन दिया जा रहा है, वह उसी कार्य में खर्च भी किया जा रहा है या नहीं। लेकिन गोविंद शरण ने न तो अपना काम ठीक से किया , बल्कि इंजीनियरों व अन्य अधिकारियों से मिलकर करोड़ों का गबन किया।’

गबन व साजिश के लिए 3 साल कठोर कारावास

4. अनिल अग्रवाल, तत्कालीन लेखाकार
- गबन व साजिश के लिए 3 साल कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 3 महीने अतिरिक्त कारावास।

- धोखाधड़ी व साजिश में 3 साल कठोर कारावास व 25 हजार जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष की और जेल।

- धोखाधड़ी व साजिश के आरोप में 2 वर्ष के कठोर कारावास व 5 हजार रुपये का जुर्माना। जुर्माना नहीं चुकाने पर 2 महीने का अतिरिक्त कारावास।

- धोखाधड़ी व साजिश के लिए एक साल कारावास व 5 हजार जुर्माना। जुर्माना न जमा करने पर 2 महीने की जेल।
- जाली दस्तावेज तैयार करने के लिए 1 साल के कठोर कारावास की सजा।

कोर्ट कमेंट : दबाव और फायदे के लिए किए आपराधिक काम
लेखाकार के पद पर रहते हुए अग्रवाल लैकफेड के प्रबंध निदेशक, महाप्रबंधक व मुख्य अभियंता निर्देश अनुसार काम करता था। उसने जो आपराधिक कार्य किए वह वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में किए गए और छोटे किस्म के आर्थिक फायदों के लिए किए गए।

5. दिनेश कुमार साहू, अधीक्षण अभियंता
- गबन व साजिश के लिए 7 साल के कठोर कारावास और 50 लाख लाख रुपये जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 1 साल अतिरिक्त कारावास।

कोर्ट कमेंट : कर्तव्य भूल धन का गबन
मुख्य अभियंता के बाद साहू के पास सबसे महत्वपूर्ण पद था। उसने न केवल अपने कर्तव्यों का पालन किया बल्कि गबन किया।
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कठोर कारावास के साथ सात साल की सजा

6. अजय कुमार दोहरे, अधिशासी अभियंता
- गबन व साजिश के लिए 7 साल के कठोर कारावास और 25 लाख लाख रुपये जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 1 साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

कोर्ट कमेंट : लाखों का गबन
दोहरे ने पिछड़ा वर्ग क्षेत्र अनुदान राशि में से लाखों रुपयों का गबन किया है।

7. संजय कुमार, सहायक इंजीनियर
- गबन व साजिश के लिए 5 साल कठोर कारावास और 5 लाख लाख रुपये जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर 1 साल अतिरिक्त कारावास।

कोर्ट कमेंट :अभियंता रहते हुए गबन
घटना के समय संजय कुमार प्रभारी अधिशासी अभियंता था। लेकिन उसने लाखों रुपयों का गबन किया।
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