नया साल ढेरों उम्मीदें और सौगातें लेकर आया है। नौकरियों का पिटारा खुलेगा तो व्यवस्थाओं में कुछ बेहतर बदलाव भी होंगे। कुछ राहतें मिलेंगी तो काम में रफ्तार भी आएगी। परिदृश्य भी बदलेगा।
सियासी अखाड़े गांव-गांव तक सजेंगे। नया साल अपने दामन में क्या-क्या लेकर आया है, पेश है महेंद्र तिवारी की खास रिपोर्ट....
नए वित्तीय वर्ष से त्रिस्तरीय ग्राम व नगरीय पंचायतों को खर्च के लिए ज्यादा रकम मिल सकती है। चतुर्थ वित्त आयोग ने इसकी उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
पूर्व मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्त की अध्यक्षता में गठित चतुर्थ वित्त आयोग ने राज्यपाल राम नाईक को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट आने वाले सत्र में विधानमंडल में रखी जा सकती है।
सरकार को आयोग की संस्तुतियों पर विचार कर इसे लागू करना है। सूत्रों का कहना है, आयोग ने राज्य सरकार के राजस्व से नगरीय निकायों व ग्रामीण पंचायतों की जो हिस्सेदारी तय की है वह मौजूदा हिस्से से कहीं ज्यादा है।
सरकार ने सिफारिशों को स्वीकार किया तो पंचायतों को क्षेत्र के विकास के लिए ज्यादा रकम मिलने लगेगी।
निशक्तों को मिलेगी स्टांप शुल्क में छूट
निशक्तजनों के लिए नया साल खास साबित हो सकता है। उन्हें जमीन खरीदने पर सरकार स्टांप शुल्क में छूट देने की तैयारी कर रही है। साथ ही स्टांप में छूट की सीमा भी बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
इस प्रस्ताव को कैबिनेट से पास कराने को लेकर राय-मशविरा चल रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक निशक्तजन अभी प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी जैसी सरकारी संस्थाओं से जमीन खरीदने पर स्टांप शुल्क में छूट पाते हैं।
अब सरकार छूट का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। वे कहीं भी किसी से भी जमीन खरीदकर कारोबार या खेती कर सकते हैं। जिनकी निशक्तता प्रतिशत कम है वे अभी किसी संपत्ति की खरीद पर एक लाख रुपये की संपत्ति की वैल्यू तक स्टांप शुल्क में पूरी छूट पाते हैं।
इसके बाद की प्रॉपर्टी वैल्यू पर उन्हें बाकी स्टांप अदा करना पड़ता है। सरकार छूट की सीमा पांच लाख रुपये करने पर विचार कर रही है।
वहीं जिनका निशक्तता प्रतिशत ज्यादा है उन्हें अभी दस लाख रुपये तक के प्रॉपर्टी वैल्यू पर स्टांप शुल्क से पूरी तरह छूट मिलती है।
इसके बाद के प्रॉपर्टी वैल्यू पर स्टांप शुल्क में तीन प्रतिशत की छूट दी जाती है। नए प्रस्ताव में गंभीर निशक्तों के लिए स्टांप शुल्क की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की तैयारी है।
बेरोजगारों का इंतजार होगा खत्म
नया साल युवाओं के लिए बेहद खास होगा। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करीब सवा दो लाख लोगों को नौकरियां देगा तो 72 हजार युवाओं के शिक्षक बनने का सपना भी पूरा होगा।
प्रदेश में विभिन्न विभागों में करीब पांच लाख पद खाली हैं। सरकार ने समूह ‘ग’ के खाली पदों को भरने के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन कर दिया है।
आयोग ने पांच जनवरी तक विभागों से खाली पदों का ब्यौरा मांगा है। पूरी संभावना है कि जनवरी में ही नौकरियों के लिए आवेदन मांग लिए जाएंगे।
आयोग ने उम्मीद के हिसाब से काम किया तो नए साल में बड़ी तादाद में युवाओं को नौकरियां मिल सकेंगी।
72 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन दिए जाने से इसकी अड़चन दूर हो गई है। इसके आलवा माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड व राज्य लोक सेवा आयोग से बड़ी तादाद में भर्तियां शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है।