केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस ने पिछले दस सालों में कानूनी हक के जरिए लोगों को अधिकार देने का नया दृष्टिकोण पेश किया है।
पार्टी ने ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण कानून सहित सूचना का अधिकार (आरटीई), मनरेगा, वन अधिकार अधिनियम, शिक्षा का अधिकार और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लोगों को उपलब्ध कराए।
कांग्रेस इन छह कानूनों के साथ चुनाव मैदान में जाएगी और लोगों को बताएगी कि ये ऐतिहासिक काम कोई दूसरा नहीं कर पाया। इसे कांग्रेस ने कर दिखाया।
उन्होंने कहा कि नया भूमि अधिग्रहण कानून भट्टा-परसौल में भी लागू होगा, जहां की घटना ने इसके बनने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि संसद से पास हुए इस विधेयक को मंजूरी के लिए सोमवार को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
अगले दो महीने में यह कानून लागू हो जाएगा।
जयराम रमेश ने भूमि अधिग्रहण कानून की खूबियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के समय में बनाई गई भूमि अधिग्रहण नीति-2010 से कहीं बेहतर है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कानून के जरिए प्राप्त मुआवजा न सिर्फ स्टांप ड्यूटी से मुक्त होगा बल्कि आयकर से भी मुक्त होगा। भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही समयबद्ध तरीके से निपटानी होगी, अन्यथा अफसरों पर दंड लगेगा।
इसमें अधिग्रहण के पहले पुनर्वास व व्यवस्थापन का प्रावधान किया गया है, जो इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। साथ ही पांच वर्ष पहले के अधिग्रहण यदि अब तक क्रियान्वित नहीं हुए हैं तो उससे प्रभावित लोग भी नए कानून का फायदा पाएंगे।
सपा सरकार चाहे तो बढ़ा सकती है मुआवजा
उन्होंने बताया कि राज्य इससे अधिक सहूलियतों वाला कानून तो बना सकते हैं लेकिन इससे कम वाले प्रावधान लागू नहीं होंगे। मसलन प्रदेश की सपा सरकार चाहे तो मुआवजे का हिस्सा अपने वादे के मुताबिक छह गुना कर सकती है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि सपा सरकार इसे चार गुना से कम नहीं कर सकती। इस मौके पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी, कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश सिंह, वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी आदि उपस्थित रहे।