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एक साल में ‘बेचारे से वीआईपी’ बन गए 'टाइगर किड'

Sun, 22 Sep 2013 01:15 AM IST
आशुतोष मिश्र/लखनऊ
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ठीक एक साल पहले वो बेचारे थे। लाचार इतने की आंखें तक नहीं खुली थी और जंगल में तीन-चार रात अकेले ही पड़े रहे।
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उसके बाद रेस्क्यू कर उन्हें जू लाया गया। बस किस्मत का सितारा यहीं पलटा कि अब वे प्रदेश के सबसे ताकतवर तेंदुए बन चुके हैं।

मुख्यमंत्री के बच्चों टीना, अदिति और अर्जुन को ये बेहद प्यारे हैं। खुद सीएम भी उनके मुरीद है और इन सबसे इतर आए दिन शासन-प्रशासन से जुड़े खास लोग उनका हालचाल लेते रहते हैं।

जंतु उद्यान राज्यमंत्री भी जू विजिट में उनसे मिलना नहीं भूलते। 22 से 24 सितंबर के बीच जन्मे और अपनी मां से बिछुड़े तेंदुए के तीनों बच्चे ईना, मीना व डीका इस एक साल के सफर में ‘बेचारे से वीआईपी’ बन चुके हैं।
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बिजनौर के एक गन्ने के खेत से रेस्क्यू कर 25 सितंबर 2012 को जब लखनऊ जू लाया गया तब इन तीनों शावकों की न तो आंखें खुली थी और न ही वे ठीक से चल पाते थे।

29 सितंबर को अखबारों में उनकी मासूम तस्वीरों को देखकर सबसे पहले इनसे दोस्ती करने सूबे का सबसे वीआईपी परिवार आगे आया और अगले ही दिन सीएम के तीनों बच्चे टीना, अर्जुन, अदिति सांसद मां डिंपल यादव के साथ इन मासूम शावकों को देखने पहुंचे।

उसके बाद तो ये सिलसिला लंबा चल निकला। वन्य प्राणि सप्ताह में आए मुख्यमंत्री भी खुद उनकी अठखेलियों पर चर्चा से नहीं चूके। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह का परिवार उनका बड़ा फैन हो चुका है। बीते एक साल में कम से कम आधा दर्जन वीवीआईपी दौरों ने उनका कद ही बढ़ाया है।

कब-कब आए वीआईपी
- 30 सितंबर 2012 को सांसद डिंपल यादव अपने बेटे अर्जुन, अदिति, टीना के अलावा परिवार के अन्य बच्चों के साथ जू पहुंची।
- 27 जनवरी 2013 को सपा नेता रामगोपाल यादव परिवार सहित घूमने पहुंचे।
- 8 अप्रैल को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक पत्नी अपर्णा के साथ जू पहुंचे और ईना, मीना व डीका को देखा।
- 11 जून को मुख्यमंत्री के बच्चों ने चिड़ियाघर में तीन घंटे सैर की।
- 15 सितंबर को फिर सीएम के बच्चे करीब दो घंटों के लिए जू पहुंचे।
- इसके अलावा जंतु उद्यान राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव आधा दर्जन से अधिक और पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. रुपक डे अपने हर दौरे में उनका हालचाल उनके ब्लॉक के पास जाकर जरूर लेते हैं।

खाते हैं रोजाना डेढ़ किलो गोश्त
बिजनौर के एक गन्ने के खेत से 25 सितंबर को रेस्क्यू कर लखनऊ जू लाए गए तेंदुओं के तीनों शावकों को जू के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला की देखरेख में रखा गया था।
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उनके मुताबिक शावकों को शुरू में महीने भर से भी अधिक समय तक 250 ग्राम से 400 ग्राम तक बकरी का दूध दिया जाता था।

जू कर्मचारी हरेंद्र ने उन्हें गोद में बैठकर महीनों तक दूध पिलाया। उसके बाद उन्होंने पाश्ता के साइज का चिकन खाना शुरू किया। आज ये तीनों शावक रोजाना एक से डेढ़ किलो गोश्त खा रहे हैं।
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