लखनऊ। ''ईरान और इस्राइल के बीच छिड़ी जंग अब तेज हो चुकी है। इस्राइल की राजधानी तेल अवीव और उसके आसपास के शहर धमाकों से दहल उठे हैं। यहां दिन-रात सिर्फ बमबारी की आवाजें ही सुनाई देती हैं। ऐसा लगता है जैसे मौत सिर पर मंडरा रही हो। पूरा इलाका जंग के मैदान में तब्दील हो गया है... सायरन बाद में बजता है, धमाके पहले शुरू हो जाते हैं।''
दहशतभरी ये आपबीती है लखनऊ के अमौसी निवासी राजू प्रसाद की। वह इस्राइल में अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं। रोजाना बंकर में छिपकर जान बचाना ही उनका काम बन गया है। काम पूरी तरह ठप है और बाहर निकलना तो जैसे मौत को दावत देना है। उन्होंने शनिवार को अमर उजाला से फोन पर बातचीत में बताया, ''हर पल लगता है कि अगला धमाका शायद मेरी तरफ हो... लेकिन भारतीय दूतावास से थोड़ी राहत की खबर आई है। वतन वापसी के लिए पंजीकरण शुरू हो गया है।''
वहीं, तेलीबाग के धर्मेंद्र कुमार की आंखों में भी डर साफ झलकता है। उन्होंने बताया, यहां अब पैसा मायने नहीं रखता... जिंदगी सबसे कीमती है। हम भूखे-प्यासे हैं, लेकिन सिर्फ एक ही ख्वाहिश है- किसी तरह हिंदुस्तान की मिट्टी को दोबारा छू सकूं। हर रोज घर से फोन आता है, आंसुओं से भीगे परिजनों आवाज सुनकर खुद को रोक पाना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों को ऑनलाइन पंजीकरण का निर्देश दिया है। कहा गया है कि जैसे ही हालात और बिगड़े, वतन वापसी की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी।
तनख्वाह गई, अब सिर्फ उम्मीद बची
बीकेटी निवासी अक्षय सिंह इस समय फलस्तीन सीमा के पास एक साइट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वहां 24 घंटे मौत मंडराती रहती है। हर पल ऐसा लगता है जैसे जिंदगी रेत की तरह हाथों से फिसल रही है। हमें आपात स्थिति में छुट्टी दे दी गई है। एक हफ्ते से काम नहीं किया, अब तनख्वाह भी नहीं मिलेगी। जेब में बचा हुआ पैसा ही सहारा है। यहां हर तरफ डर और सन्नाटा पसरा है। अब बस एक ही चाह है- किसी तरह वापस वतन लौट सकूं।
राजधानी से 71, प्रदेशभर से 5000 कामगार इस्राइल में दे रहे सेवा
पिछले डेढ़ साल से भारतीय श्रमिक इस्राइल में सेवा दे रहे हैं। दो चरण की हुई चयन प्रकिया में राजधानी से 71 व प्रदेश से 5000 से अधिक कामगारों को इस्राइल भेजा गया। कामगारों के अनुसार, यहां से यदि वतन वापसी होती है तो कम ही उम्मीद है कि सरकार वापस बुलाए, क्योंकि स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। यहां के नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी के साथ भारतीय कामगारों की सुरक्षा किसी चुनौती से कम नहीं है।