कमलेश तिवारी हत्याकांड
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प्रदेश के बड़े अफसर भी अब इस संभावना से इंकार नहीं कर रहे हैं कि वारदात के तार किसी पूर्व स्थापित संगठन से जुड़े हों। कमलेश तिवारी मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को संदर्भित किए जाने की संभावना बन गई है क्योंकि मामले के तार गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब के बाद कर्नाटक तक पहुंच चुकी है। मामले में सूरत के तीन साजिशकर्ताओं के बाद नागपुर से भी एक को गिरफ्तार किया गया है।
यूपी एटीएस अन्य राज्यों की एटीएस से संपर्क बनाए हुए है और इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियों की पड़ताल भी इस पूरे मामले के पीछे किसी संगठन का हाथ होने की आशंका जता रही हैं।
कमलेश हत्याकांड के तार इस तरह अलग-अलग जगहों से जुड़े
- कमलेश की हत्या से जुड़े एक संदिग्ध सैयद आसिम अली को नागपुर से गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र एटीएस ने बताया कि उसकी हत्याकांड में महत्वपूर्ण भूमिका थी। वह हत्यारोपियों से लगातार संपर्क में था। सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने आसिम से सरेंडर करने के लिए मदद मांगी थी। उसने कर्नाटक में सरेंडर करने का सुझाव दिया था।
- गुजरात के सूरत से मिठाई खरीदी गई। हत्यारोपी उसी मिठाई के डिब्बे में पिस्टल व चाकू छिपाकर कमलेश के दफ्तर पहुंचे और हत्या की। सूरत से ही साजिशकर्ताओं फैजान, मौलाना मोहसिन शेख व रशीद अहमद पठान को गिरफ्तार किया गया।
- लखीमपुर के पलिया से किराये पर इनोवा कार बुक की गई। फरार हत्यारोपी उसी से शाहजहांपुर पहुंचे।
- चर्चा है कि आरोपियों के मददगार बरेली में भी हैं, क्योंकि जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें इलाज में मदद पहुंचाई गई।
नेपाल बॉर्डर पार करना चाहते थे दोनों आरोपी
कमलेश के संदिग्ध हत्यारे रविवार रात शाहजहांपुर में दिखाई दिए। इसके बाद यहां पहुंची एसटीएफ और एटीएस ने संदिग्धों की तलाश में होटलों और मदरसों के मुसाफिरखानों में ताबड़तोड़ छापे मारे। दोनों संदिग्ध लखीमपुर जिले के पलिया से किराये पर इनोवा बुक कर शाहजहांपुर पहुंचे थे।
एसटीएफ ने ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है। उसने बताया कि दोनों नेपाल बॉर्डर पार करना चाहते थे, लेकिन चौकसी देख शाहजहांपुर गए और टैक्सी छोड़ दी। जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि आरोपी अभी शाहजहांपुर में ही छिपे हैं या कहीं और भाग निकले हैं।
सरेंडर के लिए ठाकुरगंज के वकील से किया संपर्क
अशफाक व मोइनुद्दीन ने ठाकुरगंज के एक वकील को फोन कर कोर्ट में सरेंडर करने के बारे में बातचीत की। वकील ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था, वह लखीमपुर के पलिया के टैक्सी चालक का था। आरोपियों ने उससे मोबाइल मांगकर फोन किया था।