शिकायतकर्ता के अनुसार तीन साल के प्रशिक्षण के समय को अनुभव के रूप में दिखाकर नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी की गई है। एनएचएम के अधिकारियों की मदद से उनका चयन भी ऑफिस ऑडिटर के पद पर हो गया। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट ने एक मुकदमे में फैसला दिया है कि प्रशिक्षु को कर्मचारी नहीं माना जा सकता है। जबकि अभ्यर्थी ने प्रशिक्षण के समय को अनुभव प्रमाण पत्र के रूप में इस्तेमाल किया है।
शिकायतकर्ता ने इस नियुक्ति में अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई है। एनएचएम के वित्त नियंत्रक जीएस कलसी ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।