राज्य सरकार ने पुलिस महकमें में भारी बदलाव करते हुए 94 आईपीएस अफसरों को इधर से उधर कर दिया। चार जोन में नए आईजी तैनात किए गए हैं तो तीन रेंज में नए डीआईजी। जकी अहमद को नॉन कंट्रोवर्शियल अफसर मानते हुए लखनऊ का आईजी बना दिया गया है।
वहीं, डीजीपी पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे दो बड़े अफसरों को किनारे कर दिया गया। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब डीजीपी के पद पर नई तैनाती को लेकर दावेदारी शुरू हो गई है। इस बीच डीजीपी एके गुप्ता को तीन माह का एक्सटेंशन देने के लिए केंद्र को चिट्ठी भेज दी है।
हाल ही में हुई डीपीसी के बाद एडीजी से डीजी बने पुलिस मुख्यालय में तैनात डॉ. सूर्य कुमार को एसआईटी का डीजी बनाकर इस रेस से बाहर कर दिया गया। एके गुप्ता को डीजीपी बनाकर उन्हें पहले भी संदेश दिया गया था लेकिन गुप्ता के रिटायर होने की स्थिति में एक बार फिर डॉ. सूर्य के पैरोकार सक्रिय बताए जा रहे थे।
इसी तरह डीजी बने वीके गुप्ता को भी सरकार ने पुलिस आवास निगम के अपेक्षाकृत कम महत्व वाले पद पर भेज कर उनको भी डीजीपी के पद से बाहर होने का संदेश दे दिया है।
एडीजी सुतापा सान्याला को भेजा मानवाधिकार
वहीं, राज्य स्तर पर गठित महिला प्रकोष्ठ की कमान संभालने वाली और आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन जैसे महत्वपूर्ण विभाग की एडीजी रही सुतापा सान्याल को हटाकर मानवाधिकार भेज दिया गया है।
माना जा रहा है कि महिलाओं की योजना में अधिक सक्रिय भूमिका न निभाने की वजह से उन्हें विदा किया गया। वहीं, सरकार के नजदीकी माने जाने वाले दलजीत सिंह चौधरी को आईजी से एडीजी बनने पर कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर रहे आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की कमान दे दी गई है।
जानकारों के अनुसार आईजी से एडीजी बनने के बाद सुभाष चंद्र ने स्वयं ही पीएसी में जाने की इच्छा जताई थी, जिस पर जावीद अहमद के पास अतिरिक्त प्रभार के तौर पर मौजूद एडीजी पीएसी का पद वापस लेते हुए उन्हें पीएसी का एडीजी बना दिया गया।
जकी अहमद को आईजी लखनऊ बना दिया गया।
हालांकि सूबे के दो जोन में तैनात आईजी के साथ ही सरकार के काफी करीबी एक आईजी भी लखनऊ जोन का आईजी बनने के लिए जोर आजमाइश कर रहे थे। जकी अहमद की तैनाती से पश्चिमी यूपी में तैनात दोनों आईजी के साथ करीबी आईजी को भी सरकार ने सीधा संदेश दे दिया है।
तबादलों में भी दिखी सियासत
मिर्जापुर के डीआईजी एमडी कर्णधार को लेकर स्थानीय नेताओं की कुछ शिकायतें थीं। सरकार ने उन्हें डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इतनी लंबी लिस्ट में इकलौते कर्णधार ही ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
बाकी के सभी अफसरों को कहीं न कहीं तैनाती दी गई है।
सियासत में ऊंची दखल रखने वाले शिव सागर सिंह को उनकी जगह मिर्जापुर का डीआईजी बनाया गया है। शिव सागर सिंह की एक केंद्रीय मंत्री और इस मंत्री के करीबी प्रदेश के एक काबीना मंत्री से नजदीकी की जानकारी आम है। सहारनपुर के एसएसपी राजेश पांडेय के खिलाफ कई धर्म गुरुओं की शिकायत थी।
उन्होंने अपनी पैरवी में नोएडा से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगाई लेकिन कुर्सी नहीं बच सकी। मेरठ के एसएसपी ओंकार सिंह को बढ़ते अपराध और पार्टी नेताओं की नाराजगी के चलते हटाया गया तो बाराबंकी के कप्तान अब्दुल हमीद भी शिकायतों पर हटाए गए।
ऐसे ही कई जिलों से कप्तानों को हटाने के पीछे पार्टी के नेताओं की नाराजगी बताई जा रही है। हालांकि तबादलों की इस सूची में एडीजी कार्मिक और एसएसपी एसटीएफ की तैनाती की गई है। लेकिन इन दोनों पदों पर पहले से तैनात अधिकारियों का क्या हुआ, इसका कोई जिक्र नहीं है।
चार जोन में आए नए आईजी
राज्य सरकार ने पुलिस अफसरों की तैनाती में एक व्यापक फेरबदल करते हुए चार जोन में नए आईजी, तीन रेंज में नए डीआईजी और 32 जिलों में नए पुलिस कप्तानों की तैनाती कर दी है। मंगलवार को हुए तबादलों के क्रम में कुल 94 आईपीएस व 15 पीपीएस अफसर इधर से उधर किए गए हैं।
आईपीएस अफसरों में राजेंद्र प्रसाद पांडेय को पुलिस अधीक्षक हापुड़ से पुलिस अधीक्षक बांदा, शिवहरि मीना को पुलिस अधीक्षक (नगर) गाजियाबाद से पुलिस अधीक्षक मैनपुरी बनाया गया है। विभिन्न पदों पर डीपीसी होने की वजह से पुलिस अफसरों की तैनाती में फेरबदल की सूची पिछले एक अरसे से रुकी हुई थी।
पिछले दिनों जब एडीजी से डीजी, आईजी से एडीजी, डीआईजी से आईजी और एसपी से डीआईजी के पद पर अधिकारियों की डीपीसी होने के बाद से ही यह तबादले संभावित थे। लेकिन डीजी पद पर आईपीएस काडर रिव्यू को लेकर प्रोन्नति की बैठक में कुछ विलंब होने की वजह से यह सूची लटकी रही।