1767 में भारत आए आस्ट्रिया के फादर जोसेफ टीफेंथेलर ने भी उल्लेख किया है कि उन्हें बताया गया कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। 1801 में भारत आए अंग्रेज पर्यटक सी मेंटल ने भी औरंगजेब द्वारा मस्जिद तोड़े जाने की बात लिखी है।
1841 में बने एक गजेटियर में भी औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने जाने का जिक्र है। 1631 में हिंदुस्तान आए इटली के पर्यटक डीलेट ने जिक्र किया है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर देखा है। इसी प्रकार 1634 में भारत में आए इंग्लैंड यात्री हर्बट ने जिक्र किया है कि अयोध्या में बहुत प्राचीन इमारतें हैं लेकिन उन सब में सबसे महत्वपूर्ण वह है जिसे रामजी ने बनवाया था।
कुणाल का कहना है कि आम धारणा यह है कि बाबर ने रामजन्मभूमि मंदिर तोड़ा था यह गलत है। बाबर के नाम से जो मस्जिद कही जाती है, वह कभी बनी ही नहीं। मंदिर को तोड़े जाने की घटना 1528 ईसवीं में बाबर के शासनकाल में नहीं हुई थी, बल्कि यह घटना 1660 ई. में हुई जब फिदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गवर्नर था।
बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं, इसलिए यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गवर्नर मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी। पुस्तक में यह भी कहा गया है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक उदार थे उनमें कट्टरता नहीं थी।
वे बताते हैं कि मुस्लिम शासक दाराशिकोह को सपने में दो दिव्य पुरूष दिखे, जिसमें एक थे वशिष्ठ और दूसरे थे राम। राम ने दाराशिकोह के सिर पर हाथ रखकर आर्शीवाद दिया। यह बात जब दारा ने औरंगजेब को बताई तो वह नाराज हो गया चूंकि वह कट्टर था इसलिए हिंदू धर्म पर हमला करना शुरू कर दिया और हिंदू मंदिरों को तोड़वाया।