मुजफ्फरनगर के कवाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सितंबर में एसएसपी पद से हटाई गईं मंजिल सैनी ने पांच माह की लंबी छुट्टी मांगी है।
यह छुट्टी उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर जाने की इजाजत न मिलने के बाद मांगी है।
कानून व्यवस्था के नाम पर हटाई गईं सैनी तीसरी आईपीएस हैं, जिन्होंने प्रतिनियुक्ति पर जाने की दरख्वास्त दी थी।
उनके अलावा सूबे के 17 आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं। मंजिल सैनी इस समय पीएसी की सीतापुर स्थित 11वीं वाहिनी की सेनानायक हैं।
पढ़ें- जयराम ने लिखी अखिलेश को ये कैसी चिट्ठी?
पीएसी मुख्यालय के डीआईजी ने उनकी छुट्टी का प्रार्थना पत्र डीजी रंजन द्विवेदी के पास भेजा है।
बहरहाल पीएसी मुख्यालय में इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। वैसे मंजिल सैनी कोई पहली अफसर नहीं हैं जिन्हें दंगे की वजह से हटाया गया।
कुछ अरसा पहले एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अरुण कुमार को पद से हटा दिया गया था। उससे पहले एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुबेश कुमार सिंह और एडीजी जगमोहन यादव को भी इसी आधार पर हटाया गया था।
अरुण कुमार भी चले गए थे छुट्टी पर
अरुण कुमार भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति मांग चुके हैं। वे भी अवकाश पर चल गए थे।
कानून व्यवस्था के नाम पर ही आईजी मेरठ के पद से कुछ दिनों पहले हटाए गए एडीजी ओपी सिंह और सुबेश कुमार सिंह भी प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन कर चुके हैं।
पढ़िए: ये क्या दिन आ गए आजम खां के!
यही नहीं डीजी बृजलाल, डीआईजी विजय प्रकाश, आईपीएस एंटनी देवकुमार, पी. अंबेडकर, शचि घिल्डियाल समेत 18 आईपीएस अफसरों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की मंशा जता रखी है।
हालांकि राज्य सरकार ने इन पर न तो कोई विचार किया और न ही फैसला।