उत्तर प्रदेश में तीसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरमनी (जीबीसी) में आए निवेश के प्रस्तावों से पूर्वी उप्र में औद्योगिक निवेश में बढ़ती रुचि के साफ संकेत हैं। सर्वाधिक निवेश के प्रस्ताव पश्चिम उत्तर प्रदेश में आए हैं, वहीं वहीं दूसरे नंबर पर पूर्वांचल है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स व खाद्य प्रसंस्करण से लेकर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
जानकार मानते हैं कि पूर्वांचल में निवेशकों की रुचि बढ़ने के पीछे एक मुख्य कारण लखनऊ-गाजीपुर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का त्वरित गति से पूरा होना भी है। इसके अलावा हवाई सेवाओं में लगातार हो रही वृद्धि से भी निवेशक काफी आशांवित हैं। यही वजह है कि बड़े, मझोले और लघु उद्योगों के लिए अब पूर्वी उत्तर प्रदेश एक पसंदीदा क्षेत्र बनाता जा रहा है। 200 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव भी अच्छी खासी संख्या में हैं। आने वाले समय में अन्य परियोजनाओं के पूरा हो जाने के साथ ही पूर्वी उप्र में बड़े स्तर पर नए उद्योग शुरू होने की संभावना है।
पूर्वांचल में 23 सौ करोड़ का निवेश
पूर्वांचल के औद्योगिक विकास में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी ने एक नई जान फूंक दी है। पूर्वांचल के सात जिलों में 23 सौ करोड़ के निवेश से जहां पांच हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं सरकार के कोष में भी इजाफा होगा। पूर्वांचल के कामगार, श्रमिक पलायन नहीं करेंगे, बल्कि घर में ही रहकर अपनी जीविका चलाएंगे। उद्यमियों के अनुसार पिछले चार-पांच साल में वाराणसी समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों में औद्योगिक विकास को गति मिली है। लखनऊ में हुए ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में इस बार पूर्वांचल में निवेश का ग्राफ पिछले सेरेमनी की तुलना में काफी चढ़ा है।
सबसे अधिक फूड और सिल्क की इकाईयों में निवेश
बनारस में 350 करोड़ का निवेश तो वहीं मिर्जापुर में 795 करोड़ का निवेश हुआ। सोनभद्र में 600 करोड़, आजमगढ़ में 400 करोड़, बलिया में 451 करोड़, चंदौली में 86 करोड़ और जौनपुर में 19 करोड़ का निवेश औद्योगिक इकाइयों ने किया है। बनारस में सबसे अधिक फूड इकाइयों और सिल्क से जुड़ी इकाइयां निवेश को आगे आईं हैं। फूड एग्रो पार्क करखियांव की इकाइयां सबसे अधिक हैं। तकरीबन 80 प्रतिशत फूड की इकाईयां जबकि 20 प्रतिशत में सिल्क व अन्य कारोबार हैं।
वाराणसी समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में उद्योग इकाईयां लगाने के लिए कंपनियां आगे आ रही हैं। उद्योग के अनुकूल माहौल है। यहां निवेश से रोजगार, राजस्व में बढ़ोतरी होगी। कामगारों को एक तरह से घरों में ही काम धंधे मिल जाएंगे।
- वीरेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग
उद्यम प्रदेश बनाने की दिशा में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में पूर्वांचल में 23 सौ करोड़ का निवेश निश्चित ही आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। युवाओं को रोजगार मिलेगा। अपने यहां कानून व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में बेहतर होने के बाद बाहर की कंपनियों ने यहां निवेश में अपनी रुचि दिखा रही हैं। ईज आफ डूइंग में 13वें नंबर से यूपी अब दूसरे नंबर पर आ चुका है।
- आरके चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
चार-पांच साल में पूर्वांचल में बहुत बदलाव आया है। सड़क, बिजली, परिवहन का विकास हुआ। एयरपोर्ट, जलमार्ग और रिंग रोड जैसी सुविधाएं होने से निवेशकों का झुकाव पूर्वांचल में बढ़ रहा है। 23 सौ करोड़ का निवेश होने से पूर्वांचल के कामगार, मजदूर और अब पलायन नहीं करेंगे।
- राजेश भाटिया, राष्ट्रीय सचिव, आईआईए
पूर्वांचल में निवेश उत्साह बढ़ाने वाला संकेत
डीएवी पीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनूप मिश्र का कहना है कि तीसरे ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिये प्रदेश में डेटा सेंटर से लेकर यूनिवर्सिटी व डेयरी प्लांट तक लगने जा रहे हैं। सर्वाधिक 805 एमएसएमई के प्रोजेक्ट स्थापित होंगे। इसके बाद कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल सप्लाई, शिक्षा, डेयरी व पशुपालन के प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने पर प्रदेश में पांच लाख रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई जा रही है। एक बार फिर निवेशकों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ही अपना फेवरेट डेस्टिनेशन माना और कुल प्रस्तावित निवेश का लगभग 74 प्रतिशत उसी हिस्से जाता दिखाई पड़ रहा है। इसके बाद भी पूर्वांचल के हिस्से कुल प्रस्तावित निवेश का लगभग 12 प्रतिशत आना एक उत्साहवर्धक संकेत है।
प्रदेश का चतुर्मुखी विकास होगा
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में वाणिज्य एवं प्रबंधशास्त्र संकाय के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. अजित कुमार शुक्ला ने कहा कि ग्राउंड ब्रेक्रिंग सेरेमनी से प्रदेश का चतुर्मुखी विकास होगा। आधारभूत ढांचे के निर्माण के साथ ही विकास के नए-नए मार्ग प्रशस्त होंगे। नए उद्योगों की स्थापना से दूसरे उद्योगों के लिए भी राह खुलेगी। इसके अलावा होटल, टूरिज्म इंडस्ट्री के साथ सप्लाई चेन मजबूत होगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और बेरोजगारी की समस्या दूर होगी। इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और स्टैंडर्ड आफ लिविंग में सुधार होगा।
एक नजर में जिलावार निवेश के आंकड़े
- बनारस 350 करोड़
- मिर्जापुर 795 करोड़
- सोनभद्र 600 करोड़
- बलिया 451 करोड़
- आजमगढ़ 400 करोड़
- चंदौली 86 करोड़
- जौनपुर 19 करोड़