ताजा मामला 12 मई को हुई रैगिंग का है। इस मामले में कानपुर निवासी एक छात्र की मां ने शिकायत की थी। बताया जाता है कि शिकायतकर्ता केजीएमयू की छात्रा रह चुकी हैं। शिकायत में बताया गया था कि रैगिंग के शिकार आठ छात्र हुए हैं। आरोपी 13 छात्रों में दो एमबीबीएस 2015 बैच और 11 एमबीबीएस 2016 बैच के हैं।
इस पर केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी आरोपी छात्रों को हॉस्टल से बेदखल कर दिया। इतना ही नहीं उनके कैंपस में घुसने पर रोक लगा दी। मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. जीपी सिंह के नेतृत्व में गठित कमेटी में फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा, रेस्पेरेटरी विभाग के डॉ. आनंद श्रीवास्तव, क्वीन मैरी की डॉ. सुजाता देव और डेंटल से डॉ. नंदलाल को शामिल किया गया है।
दूसरी तरफ जांच कमेटी से आरोपी छात्रों ने गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वे रैगिंग नहीं किए थे। सिर्फ छात्रों से बातचीत की गई थी। वे इस मामले में जूनियर छात्रों से भी माफी मांगने के लिए तैयार हैं। आरोपी छात्रों ने केजीएमयू प्रशासन से माफी मांगते हुए एक मौका मांगा है। उनका कहना है कि परीक्षा को देखते हुए उनका हॉस्टल से बेदखली का आदेश वापस लिया जाए।