सूत्रों के मुताबिक गिरिजा त्रिपाठी के संरक्षण गृह का लाइसेंस निरस्त होने के बाद पूर्व एसपी ने एक सर्कुलर जारी किया था, इसमें पुलिस की कस्टडी में आई लड़कियों को इस संरक्षण गृह में न रखने की बात कही गई थी।
मौजूदा एसपी रोहन पी कनय ने भी इस मामले में न सिर्फ वायरलेस मैसेज के जरिए सभी थानों को सूचना दी थी बल्कि लिखापढ़ी में सभी थानों को आदेश दिया था कि यहां लड़कियों व महिलाओं को न भेजा जाए।
मगर पुलिस के सामने मजबूरी यह थी कि मुकदमों से संबंधित लड़कियों को रखने के लिए देवरिया में कोई सरकारी संरक्षण गृह नहीं है। सबसे नजदीक गोरखपुर और फिर वाराणसी में है। यहां ले जाना भी पुलिस के लिए टेढ़ी खीर था। ऐसे में अधिकारियों के आदेशों को दरकिनार करते हुए इन लड़कियों को इसी संरक्षण गृह में रखा जाता रहा।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार बताते हैं कि संरक्षण गृह में कुल 48 लड़के व लड़कियां थीं। इनमें से 23 को पुलिस ने मुक्त कराया। इनमें 20 लड़की और तीन लड़के थे। जुलाई में पुलिस की ओर से विभिन्न मामलों में संरक्षण गृह भेजी गईं 15 लड़कियों को उनके परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। इन 15 लड़कियों में 14 की तस्दीक मौके पर जाकर पुलिस ने कर ली है। इन लड़कियों की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। जबकि एक लड़की की तलाश की जा रही है।
तीन लड़कियां गोरखपुर में और एक लड़की देवरिया में मिली है। वहीं पुलिस की गिरफ्त में आई संरक्षण गृह संचालिका गिरिजा का दावा है कि उसने कुछ लड़कियों की शादी करा दी और वह अपने ससुराल में हैं। उसका कहना है कि संरक्षण गृह के रजिस्टर में उसके बारे में जानकारी मौजूद है। क्योंकि संरक्षण गृह को सील कर दिया गया है, इसलिए पुलिस रजिस्टर से उन महिला व लड़कियों का पता नहीं निकाल सकी है, जिससे गिरिजा के दावों की तस्दीक हो सके।
सूत्रों के मुताबिक संरक्षण गृह में जो लड़कियां थीं, उनमें शून्य से 10 साल के उम्र की 7 लड़कियां, 10 से 18 साल की उम्र की 20 लड़कियां और 18 साल से अधिक उम्र की 16 लड़कियां थीं। बाकी के उम्र का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है।