भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के प्रभारी ओमप्रकाश माथुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘काम बोलता है’ नारे की पोल सपा-कांग्रेस गठबंधन खोल रहा है।
यदि काम बोलता तो अखिलेश यादव को कांग्रेस से गठबंधन कर बैसाखी का सहारा नहीं लेना पड़ता। माथुर कहते हैं, ट्रिपल तलाक के मुद्दे को चुनाव के दौरान जनता के सामने उठाएंगे और उसे ठीक भी करेंगे। माथुर ने बुधवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :
भाजपा की चुनावी तैयारी क्या है? क्षेत्रों से क्या फीडबैक आ रहा है?
भाजपा पहली पार्टी है जिसने बूथ स्तर तक की रिपोर्ट के साथ प्रतिदिन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की जानकारी ली। रोज 20 से 30 आम सभाएं हो रही हैं। इन सभाओं में जैसी भीड़ आ रही है, उससे मेरा विश्वास है कि भाजपा के पक्ष में जबरदस्त माहौल है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन का भाजपा पर कितना असर पड़ेगा?
ये वही गठबंधन है जिसने दिल्ली में साथ रहकर यूपीए वन और यूपीए 2 की सरकार में देश को लूटा था। आम आदमी के मन में भाव पैदा हुआ है कि पहले शायद लूट में कमी रह गई है, इसलिए ये दोनों मिलकर यूपी को लूटने की भी तैयारी कर रहे हैं।
अखिलेश यादव काम और विकास के नाम पर वोट मांग रहे हैं?
काम बोलता तो सपा को कांग्रेस की बैसाखी का सहारा क्यों लेना पड़ा? इससे साफ है कि अखिलेश यादव कमजोर हैं। उनके नारे ‘काम बोलता है’ की पोल यह गठबंधन खोलता है। उनको लगता है कि वे सरकार नहीं बना पाएंगे या सभी 403 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकते। इसीलिए उन्होंने खुद पहल कर कांग्रेस से समझौता किया और उसे 105 सीटें दीं।
यूपी की जनता भाजपा को वोट क्यों दे?
बीते 15 वर्षों में जनता बसपा और सपा को बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी है। एक पार्टी सिर्फ माया की पार्टी हो गई दूसरी पार्टी अपने परिवार में ही खो गई। दोनों दलों के नेताओं के चुनाव के शपथ पत्र में दर्शाई संपत्ति से साफ है कि बीते 15 वर्षों में इनकी जायदाद में किस तरह बढ़ोतरी हुई है। परिवारवाद, बिगड़ी कानून-व्यवस्था, व्यक्तिवाद व भ्रष्टाचार से परेशान होकर जनता भाजपा को वोट दे रही है।