सिविल सेवा की परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय रैंक हासिल करने वाले अतहर आमिर-उल-शफी खान पूरे देश में छा गए हैं। इस समय वह लखनऊ के इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट (आईआरआईटीएम) में ट्रेनिंग ले रहे हैं। कश्मीर में अनंतनाग के रहने वाले आमिर को मिली इस सफलता पर अमर उजाला ने उनसे बात की।
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सफलता के लिए आपको बहुत बधाई, इसका श्रेय आप किसे देना चाहेंगे?
- बेहद शुक्रिया। सफलता मिलने पर हर उस व्यक्ति को शुक्रिया कहना चाहूंगा जिसने मेरे जीवन में कहीं न कहीं योगदान दिया है, चाहे वह पढ़ाई हो या गाइडेंस। इन सबमें एक चेहरा दादाजी का याद आ रहा है, उन्हीं को देखकर मैं बड़ा हुआ। वे हमेशा कहते थे कि मुझे जो दौर मिल रहा है, वह अवसरों का दौर है और मुझे इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए।
आपने पढ़ाई कहां से की, परिवार से क्या सहयोग मिला?
- मैं कश्मीर में अनंतनाग के एक कस्बे मट्टन से हूं। मेरा गांव देवपुरा है। यहां से करीब एक किमी दूर मेरा स्कूल था। यहां के बाद अनंतनाग के स्कूल में पढ़ कर दसवीं पास किया। मैं औसत से कुछ बेहतर स्टूडेंट था। पिता मो. शफीखान अनंतनाग के सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं। स्कूली पढ़ाई के बाद आईआईटी, एआईट्रिपलआई, बिटसैट, सीईटी और कई अन्य परीक्षाओं में पास हुआ। लेकिन आईआईटी हिमाचल प्रदेश में एडमिशन लिया। मेरे परिवार से कोई भी सिविल सर्विस में नहीं है, लेकिन उनकी ओर से पूरा सहयोग मिला।
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कई बार हावी हो जाती थी निराशा
असफलता से ली सीख
- फोटो : social site
आईएएस बनने का विचार कैसे आया?
आईआईटी से बीटेक कर रहा था। फाइनल ईयर में यह विचार आया कि अपने देश और लोगों के लिए जो करना चाहता हूं वह इंजीनियर के बजाय प्रशासनिक अधिकारी बनके कर सकूंगा। यही सुझाव मैं अन्य स्टूडेंट्स को भी देना चाहूंगा। अगर वे आईएएस बनना चाहते हैं तो ग्रेजुएशन के दौरान ही मन बना लें।
तैयारी के दौरान किन बातों का ध्यान रखा?
- सच कहूं तो मैंने कभी तनाव नहीं लिया। 2013 में मैं आईआरआईटीएम ट्रेनिंग के लिए आ गया था। पिछले वर्ष सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 560 रैंक आई थी, जिसे मैं याद भी नहीं रखना चाहता। इस साल मैंने खुद को फोकस किया। यह तभी होता है जब आप ठान लें कि यह करना है। एक और बात विद्यार्थियों को बताना चाहूंगा कि वे घंटे तय करके पढ़ाई न करें। अपने फोकस को समझें और उसी के अनुसार पढ़ें। बाकी समय दिमाग को रिलैक्स रहने दें।
पिछली गलतियों से क्या सीखा?
- पिछली परीक्षा में जो रैंक मिली, उसके बाद मैंने अपनी तैयारियों में मौजूद खामियों पर गौर किया। कमियों को सुधारा। पढ़ाई में एकाग्रता पर ध्यान दिया। दिमाग को हर समय एक ही जगह यानी पढ़ाई में लगाए रखने की आदत को बदला।
तैयारी के दौरान कभी निराशा हुई?
- कई बार निराशा हावी हो जाती है। पिछली दफा रैंक पीछे थी, ऐसे में नकारात्मक ख्याल आना स्वभाविक है। लेकिन इस दौरान मैंने परिवार और दोस्तों से फोन पर बात करना शुरू किया, जिनकी बातें मुझे प्रोत्साहन देती थीं।
खुद की पढ़ाई से मिलती है मदद
- फोटो : amar ujala
आईएएस बनना कितना मुश्किल है?
- मेरा मानना है कि अगर सही रणनीति से तैयारी की जाए तो औसत विद्यार्थियों के लिए सिविल सर्विस बहुत सही परीक्षा है। यह आपकी बुद्धि के आधार पर आपको सफल बनाती है। इसे पूरी तरह किताबी ज्ञान वाली परीक्षा नहीं कहा जा सकता।
क्या आपने कोचिंग की थी?
- मैंने कुछ समय के लिए कोचिंग की थी, लेकिन अपने अनुभव से बता रहा हूं कि आप जितनी भी कोचिंग कर लें, खुद बैठकर जो पढ़ाई करते हैं, परीक्षा में उसी से मदद मिलती है। परीक्षा में आत्मविश्वास खुद की पढ़ाई से आता है।
इंटरव्यू कैसे रहे, कुछ अनुभव शेयर करेंगे?
- सिविल सर्विसेज में इंटरव्यू परीक्षा का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुझसे इस दौरान मेरी पढ़ाई, जम्मू-कश्मीर के हालात, खासतौर से आर्थिक हालात पर सवाल किए गए। साथ ही आईआईटी की पढ़ाई पर भी सवाल हुए। मैं विद्यार्थियों से कहना चाहूंगा कि वे जब इंटरव्यू के लिए जाएं तो अपनी अपीयरेंस का ध्यान रखें।
आईएएस के तौर कहां काम करना चाहेंगे?
- मुझे सही काडर चुनना है। अगर कश्मीर में काम करने का मौका मिला तो अच्छा लगेगा लेकिन देश के किसी भी हिस्से में जाकर काम करने में कोई परेशानी नहीं होगी। एक आईएएस ऑफिसर के तौर पर चाहूंगा कि युवाओं और प्रशासन को साथ लाकर संवाद स्थापित कर सकूं। युवाओं और प्रशासन में संवाद होगा और युवाओं को विकास में अपनी भूमिका पता होगी तो सही प्रगति हासिल की जा सकती है।