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गड़बड़ी के अंदेशे को लेकर यूपी की खुफिया एजेंसियां दोहरे दबाव में, ये है मुश्किल

Sun, 06 Oct 2019 01:07 PM IST
ishwar ashish विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों के दिल्ली में छिपे होने के इनपुट के बाद से यूपी की खुफिया एजेंसियां दोहरे दबाव में हैं। दुर्गा पूजा, दशहरा और मोहर्रम को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बढ़ी हुई है, ऊपर से आतंकियों का खतरा और आ गया है। इसे लेकर दिल्ली से सटे प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में खास सतर्कता बरती जा रही है।

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ऐसे संवेदनशील मौके पर एकीकृत कार्यवाही की कमी के अभाव से इन खुफिया एजेंसियों के हाथ कोई ठोस इनपुट नहीं आ पा रहा है। ऊपर से केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने भी त्यौहार के अवसर पर अतिरिक्त चौकसी बरते जाने को कहा हुआ है। वैसे राज्य में एनआईए और आईबी जैसी केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की इकाइयां भी सक्रिय हैं, पर खास जिम्मेदारी एटीएस व स्टेट इंटेलीजेंस की ही है। वे अपने-अपने स्तर से जानकारी जुटाने में लगी हैं।

दो दिन पहले ही सेंट्रल दिल्ली के डीसी एमएस रंधावा ने कहा था कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को इनपुट मिला है कि आतंकी संगठन जैश के चार सदस्य दिल्ली में छिपे हैं। केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में वे आतंकी वारदात करने की कोशिश कर सकते हैं।
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वहीं 10 सितंबर को ब्यूरो ऑफ सेंट्रल एविएशन सिक्योरिटी के पास कथित रूप से जैश का लिखा एक पत्र मिला था। जैश कमांडर शमशेर वानी के नाम लिखे गए इस पत्र में जम्मू-कश्मीर के हवाई अड्डों पर फिदायीन हमले की धमकी के बाद ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था।

इन हालात को देखते हुए प्रदेश की खुफिया एजेंसियां एनसीआर परिक्षेत्र के साथ ही पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ खास जिलों और राजधानी लखनऊ में खास सतर्कता बरत रही हैं। स्टेट इंटेलीजेंस धार्मिक स्थलों के साथ शिक्षा व ऐतिहासिक महत्व की जगहों पर विशेष नजर रख रही है। वहीं एटीएस आतंकी संगठनों के स्लीपिंग मॉड्यूल को चिह्नित करने की कोशिश में जुटी है। एटीएस पूर्व में उसकी जानकारी में आए मॉड्यूल्स व कुछ अन्य पर भी नजर रख रही है।

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सामंजस्य का है अभाव

एकीकृत सूचना तंत्र और इसे साझा करने की समान व्यवस्था न होने से कई बार खुफिया एजेंसियों के सामने दिक्कत पैदा हो जाती है। राज्य में ऐसी व्यवस्था नहीं है जिसमें कोई विशेष इनपुट आने पर सभी खुफिया एजेंसियां समान तंत्र पर काम करें।

कभी गृह विभाग को इनपुट मिलता है तो कभी डीजीपी या एडीजी कानून-व्यवस्था को। कई बार ऐसे इनपुट एटीएस या स्टेट इंटेलीजेंस के पास सीधे पहुंचते हैं। ऐसे में राज्य की दोनों खुफिया एजेंसियां अपने-अपने स्तर से एडीजी कानून-व्यवस्था से इसे साझा करती हैं। वहां से आगे निर्देश जारी होते हैं।

एडीजी एटीएस डीके ठाकुर का कहना है कि दिल्ली में जैश आतंकियों के छिपे होने के इनपुट को एटीएस से साझा नहीं किया गया है। एटीएस अपने स्तर से चौकस है और सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठा रही है।
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