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नशे में चलाई गाड़ी तो खैर नहीं, बजने लगेगा अलार्म, लोकेशन भी होगी ट्रेस

Tue, 16 Oct 2018 04:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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शांतनु व सौम्या सिंह और मो.आदिल - फोटो : अमर उजाला
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम की 87वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. कलाम डिजिटल लाइब्रेरी परिसर में ‘इनोवेशन गैलरी’ लगाई गई।
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इसमें विश्वविद्यालय के संबद्ध संस्थानों के विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर इनोवेशन के प्रोटो टॉइप मॉडल प्रस्तुत किए। इनोवेशन में ऐसा सिस्टम विकसित किया गया  है जो नशे में गाड़ी चलाने पर व्यक्ति  को ट्रेस करेगा और अलार्म बजने लगेगा। 

किसी ने जनजीवन बचाने तो किसी ने कूड़ा निस्तारण के लिए इनोवेशन किया है। कुछ विद्यार्थियों ने मंगल पर जीवन की संभावना तलाशने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी वाले रोवर बनाए हैं।
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ये प्रोटो टाइप मॉडल एक साल तक डॉ. कलाम इनोवेशन गैलरी में प्रदर्शित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय इन्हें और आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक व तकनीकी सहयोग देगा।
 

इनोवेशन गैलरी के विजेता सम्मानित

डेमो
विश्वविद्यालय में हुए कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक व डीन यूजी प्रो. विनीत कंसल ने डॉ. कलाम इंटरप्रेन्योरशिप लीग (केल), डॉ. कलाम स्टार्टअप परिक्रमा और डॉ. कलाम इनोवेशन गैलरी के दूसरे राउंड के विजेताओं को सम्मानित किया।

केल में केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस गाजियाबाद पहले, आईआईएमटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग गौतमबुद्ध नगर दूसरे, एबीईएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गाजियाबाद तीसरे और जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा चौथे नंबर पर रहा।

विद्यार्थियों को राज्यपाल राम नाईक द्वारा लिखित ‘चरैवेति चरैवेति’ पुस्तक भी प्रदान की गई। इस अवसर प्रो. पाठक ने कहा कि डॉ. कलाम के मिशन और विजन को पूर्ण करने का बीड़ा विश्वविद्यालय ने उठाया है।

इसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। डॉ. कलाम परिक्रमा से गोरखपुर और पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों से इनोवेटिव आइडिया निकलकर स्टार्टअप में परिवर्तित हो रहे हैं। कार्यक्रम में सृजन पाल सिंह, रजिस्ट्रार नंदलाल सिंह, कैश के निदेशक प्रो. मनीष गौड़, डीन पीजी प्रो. केवी आर्य उपस्थित थे।

बनाया ‘इलेक्ट्रॉनिक रोवर’

शांतनु मिश्रा व सौम्या सिंह - फोटो : अमर उजाला
इनोवेशन एक : इलाहाबाद के यूनाइटेड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के शांतनु मिश्रा व सौम्या सिंह ने मंगल पर जीवन को सहयोग करने वाली तकनीकी विकसित की है।

इन्होंने एक ‘इलेक्ट्रॉनिक रोवर’ बनाया है जो एक चौकोर बॉक्स जैसे बने कैप्सूल में लगे पौधे को लेकर जाएगा और उसे शिफ्ट कर देगा। अब बॉक्स में लगी विभिन्न डिवाइस से यह पता चलेगा कि उस पौधे को जीवित रहने के लिए कितने तापमान, ऊर्जा, हवा आदि की जरूरत पड़ेगी। यह अत्याधुनिक रोवर कैप्सूल को सेट करने के बाद वहां की डिस्कवरी करेगा। 

रॉकर बूगी तकनीकी पर आधारित ‘मार्स रोवर’ बनाया

सत्यम सिंह व गौरव प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
इनोवेशन दो: आईएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद के सत्यमसिंह व गौरव प्रताप सिंह ने रॉकर बूगी तकनीकी पर आधारित ‘मार्स रोवर’ बनाया है। यह ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर आसानी से चल सकता है और चलते-चलते ही ऑयलिंग-ग्रीसिंग हो जाएगी।

आगे की तरफ लगे अल्ट्रासोनिक सेंसर सामने से आने वाली वस्तु के बारे में बताएंगे। इसमें लगे संयंत्र मंगल पर फसल पैदा करने और वहां की मिट्टी की उर्वरता से जुड़ी जानकारी देगा। आईओटी से तापमान की जानकारी जुटाएगा। वाई-फाई कैमरे से बारीक फोटो ली जा सकेगी और सोलर पैनल रोवर को चार्ज करेगा।
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‘ड्रंक ड्राइविंग एलर्ट सिस्टम’ विकसित किया

मोहम्मद आदिल सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
इनोवेशन तीन : कानपुर पीएसआईटी के छात्र मोहम्मद आदिल सिद्दीकी ने ‘ड्रंक ड्राइविंग एलर्ट सिस्टम’ विकसित किया है। नशे में गाड़ी चलाने पर सेंसर से यह सिस्टम व्यक्ति को ट्रेस करेगा और स्वत: अलार्म बजने लगेगा।

जीपीएस से लोकेशन भी ट्रेस की जा सकेगी। माइक्रो कंट्रोलर से जीएसएम डिवाइस के जरिये नजदीकी पुलिस कंट्रोल रूम को मेसेज चला जाएगा और पुलिस इसे लोकेट करके पकड़ सकेगी। वाहनों में इस सिस्टम को अनिवार्य करने के बाद दुर्घटनाएं काफी कम हो सकती हैं।
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