विश्वविद्यालय में हुए कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक व डीन यूजी प्रो. विनीत कंसल ने डॉ. कलाम इंटरप्रेन्योरशिप लीग (केल), डॉ. कलाम स्टार्टअप परिक्रमा और डॉ. कलाम इनोवेशन गैलरी के दूसरे राउंड के विजेताओं को सम्मानित किया।
केल में केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस गाजियाबाद पहले, आईआईएमटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग गौतमबुद्ध नगर दूसरे, एबीईएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गाजियाबाद तीसरे और जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा चौथे नंबर पर रहा।
विद्यार्थियों को राज्यपाल राम नाईक द्वारा लिखित ‘चरैवेति चरैवेति’ पुस्तक भी प्रदान की गई। इस अवसर प्रो. पाठक ने कहा कि डॉ. कलाम के मिशन और विजन को पूर्ण करने का बीड़ा विश्वविद्यालय ने उठाया है।
इसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। डॉ. कलाम परिक्रमा से गोरखपुर और पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों से इनोवेटिव आइडिया निकलकर स्टार्टअप में परिवर्तित हो रहे हैं। कार्यक्रम में सृजन पाल सिंह, रजिस्ट्रार नंदलाल सिंह, कैश के निदेशक प्रो. मनीष गौड़, डीन पीजी प्रो. केवी आर्य उपस्थित थे।
शांतनु मिश्रा व सौम्या सिंह
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इनोवेशन एक : इलाहाबाद के यूनाइटेड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के शांतनु मिश्रा व सौम्या सिंह ने मंगल पर जीवन को सहयोग करने वाली तकनीकी विकसित की है।
इन्होंने एक ‘इलेक्ट्रॉनिक रोवर’ बनाया है जो एक चौकोर बॉक्स जैसे बने कैप्सूल में लगे पौधे को लेकर जाएगा और उसे शिफ्ट कर देगा। अब बॉक्स में लगी विभिन्न डिवाइस से यह पता चलेगा कि उस पौधे को जीवित रहने के लिए कितने तापमान, ऊर्जा, हवा आदि की जरूरत पड़ेगी। यह अत्याधुनिक रोवर कैप्सूल को सेट करने के बाद वहां की डिस्कवरी करेगा।
सत्यम सिंह व गौरव प्रताप सिंह
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इनोवेशन दो: आईएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद के सत्यमसिंह व गौरव प्रताप सिंह ने रॉकर बूगी तकनीकी पर आधारित ‘मार्स रोवर’ बनाया है। यह ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर आसानी से चल सकता है और चलते-चलते ही ऑयलिंग-ग्रीसिंग हो जाएगी।
आगे की तरफ लगे अल्ट्रासोनिक सेंसर सामने से आने वाली वस्तु के बारे में बताएंगे। इसमें लगे संयंत्र मंगल पर फसल पैदा करने और वहां की मिट्टी की उर्वरता से जुड़ी जानकारी देगा। आईओटी से तापमान की जानकारी जुटाएगा। वाई-फाई कैमरे से बारीक फोटो ली जा सकेगी और सोलर पैनल रोवर को चार्ज करेगा।