इंफर्टिलिटी व कॉर्डिअक यूनिट का उद्घाटन करते स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह।
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अब डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में भी महिलाओं की गोद भरने की चाहत पूरी होगी। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सोमवार को बांझपन की समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के साथ ही पुरुषों के इलाज के लिए इंफर्टिलिटी व छह बेड की कॉर्डिअक यूनिट का उद्घाटन किया।
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इस मौके पर मंत्री ने कहा कि इसका सबसे अधिक फायदा उन गरीब मरीजों को मिलेगा जो पैसों के अभाव में बांझपन का इलाज नहीं करा पाते हैं। इस सुविधा के साथ ही इंफर्टिलिटी का आधुनिक व मुफ्त इलाज देने वाला लोहिया अस्पताल प्रदेश का पहला जिला अस्पताल बनेगा।
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अस्पताल की एमएस डॉ. साधना सक्सेना ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में बांझपन की समस्या से पीड़ित 30 से अधिक रोज महिलाएं आती हैं। इन्हें इंफर्टिलिटी यूनिट व विशेषज्ञ न होने से उन्हें क्वीनमेरी व अन्य हायर सेंटर भेजना पड़ता है। लेकिन, अब यहां भी मरीजों में बांझपन की समस्याओं का निशुल्क इलाज किया जाएगा। इसके लिए 23-बी में हर रोज इंफर्टिलिटी ओपीडी चलाई जाएगी।
क्वीन मेरी में थी सुविधा
राजधानी में अब तक यह सुविधा केवल क्वीनमेरी अस्पताल में उपलब्ध थी, लेकिन यहां भी मरीज को इलाज के लिए पैसे खर्च करने पड़ते थे।
सीमेन एनालिसिस व एंटी मुलेरियन हार्मोन की भी होगी जांच
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डॉ. सरिता ने बताया कि इंफर्टिलिटी यूनिट के साथ दो विशेष जांचों की भी शुरुआत की गई है। महिलाओं में ओवेरियन फंक्शन की जांच के लिए एंटी मुलेरियन हार्मोन (एएमएच) जांच व पुरुषों में इंफर्टिलिटी के कारणों का पता लगाने के लिए सीमेन एनालिसिस जांच शुरू की गई है।
इसकेे अलावा बांझपन के कारणों के लिए होने वाली अन्य हार्मोनल जांचों की सुविधा पहले से ही मौजूद है। उन्होंने बताया कि इंफर्टिलिटी की समस्या में कई प्रकार की हार्मोनल व अन्य जांचें होती हैं। निजी सेंटर में जांच की कीमत 5000 रुपये से भी अधिक है। अस्पताल में यह सभी जांचें मुफ्त में होगी।
तीन विशेषज्ञों को दी गई है विशेष ट्रेनिंग
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चार महिला रोग विशेषज्ञों को इसके लिए ट्रेनिंग दी जानी थी, लेकिन अभी डॉ. अनीता नेगी, डॉ. सरिता सक्सेना व डॉ. सुनीता राय को आगरा से इंफर्टिलिटी के इलाज के लिए विशेष ट्रेनिंग दी गई है। फिलहाल यह डॉक्टर यूनिट में आ रही महिलाओं का इलाज करेंगी। वहीं डॉ. संदीपा को भी जल्द ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा।
मिलेगी आईयूआई की भी सुविधा
अस्पताल में बांझपन का इलाज केवल ओपीडी के परामर्श व दवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। यहां इंट्रा यूटेराइन इंसेमिनेशन (आईयूआई) की भी सुविधा दी जाएगी। डॉ. सरिता सक्सेना ने बताया कि आजकल प्रमुख तौर पर बांझपन का कारण स्पर्म का यूट्रस तक न पहुंचना है।
उन्होंने बताया कि अकसर स्पर्म काउंट कम होने, स्पर्म की मोबिलिटी न होने व महिलाओं में सर्वाइल म्युकस जैसी समस्याओं के चलते शुक्राणु यूट्रस तक नहीं पहुंच पाते और बांझपन की समस्या हो जाती है। ऐसी स्थिति में आईयूआई तकनीक के जरिए शुक्राणु को यूट्रस में डाल दिया जाता है। निजी सेंटर में इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी करती पड़ती है, जबकि लोहिया अस्पताल में सुविधा मुफ्त होगी।
दिल के मरीजों के लिए खुली छह बेड की कॉर्डिअक यूनिट
लोहिया अस्पताल
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लोहिया अस्पताल में दिल के मरीजों लिए छह बेड की कॉर्डिअक यूनिट की भी शुरुआत की गई है। ऐसे मरीज जिन्हें हृदय संबंधित समस्याएं हैं उन्हें अब यहां इलाज मिल सकेगा। मरीज की मॉनिटरिंग के लिए इस यूनिट में छह मॉनिटर व अन्य मशीनें लगाई गई हैं। हृदय रोगियों की जांच के लिए ट्रॉप-टी व ईसीजी जांच की भी सुविधा मौजूद है।
इस यूनिट के लिए एक कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. बीआर जैसवाल, दो एमबीबीएस डॉ. एके नाग, व डॉ. सुशील श्रीवास्तव के साथ दो पैरामेडिल व एक नर्स की टीम मौजूद रहेगी। डॉ. बीआर जैसवाल ने बताया कि यहां इमरजेंसी में आए मरीज को भी इलाज दिया जाएगा, लेकिन मरीज को कॉर्डिअक अरेस्ट व ब्लॉकेज जैसी समस्या होने की स्थिति में उसे हायर सेंटर रेफर किया जाएगा।
अस्पताल में डीएम कॉर्डियोलॉजिस्ट के साथ एंजियोग्राफी जैसी आधुनिक सुविधाएं ने होने से मरीजों को केवल बुनियादी इलाज ही दिया जाएगा।