कतर्नियाघाट के छह बाघ नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क में दहाड़ रहे हैं। इसका खुलासा हाल ही में नेपाल में की गई कैमरा ट्रैपिंग के रिकॉर्ड मिलान से हुआ है। इससे भारतीय वन्यजीव चिंतित हो उठे हैं।
बाघों की सुरक्षा के लिए नेपाल के वनाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। विशेषज्ञों की मानें तो कतर्नियाघाट के बाघ खाता कारीडोर के रास्ते नेपाल के जंगल में पहुंचे हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र विशेषकर बाघों के लिए जाना जाता है। बहराइच का यह संरक्षित वन प्रभाग नेपाल सीमा से सटा है। इतना ही नहीं, लगभग 60 किलोमीटर के दायरे में नेपाल सीमा पर फैला जंगल खाताकारीडोर के माध्यम से नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क को भी जोड़ता है।
इसके चलते अभी तक नेपाल के जंगलों में विचरण करने वाले हाथी, गैंडे व अन्य वन्यजीव खाता कारीडोर के रास्ते कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में दाखिल हो जाते थे लेकिन अब बाघों का भी आवागमन शुरू हुआ है। इसका खुलासा हाल ही में नेपाल में किए गए कैमरा ट्रैपिंग से हुआ है।
अचानक गायब हुए थे कतर्निया के बाघ
गौरतलब है कि वर्ष 2010 में कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में 32 बाघ चिह्नित किए गये थे। इन सभी की तस्वीरें थर्मों सेंसर कैमरे के माध्यम से कैद हुई थी लेकिन वर्ष 2012 में की गई गणना में महज 21 बाघ जंगल में मिले थे, जबकि वर्ष 2014 की गणना में 24 बाघों की पुष्टि हुई।
इसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि कतर्निया के बाघ कहां जा रहे हैं। इसके चलते भारतीय वन्यजीव संस्था देहरादून के बाघ विशेषज्ञों ने नेपाल में वन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के संयुक्त तत्वावधान में कराए गए कैमरा ट्रैपिंग का रिकॉर्ड मंगाया।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि रिकॉर्ड का बारीकी से अध्ययन करने पर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 की गणना में कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में जिन छह बाघों को थर्मो सेंसर कैमरे ने कतर्नियाघाट और निशानगाड़ा रेंज में कैद किया था, उन बाघों की तस्वीरें नेपाल के रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क से मंगाए गए रिकॉर्ड में मिली हैं।
उन्होंने कहा कि बाघों का मूवमेंट बना रहता है लेकिन पहली बार कतर्नियाघाट के बाघ नेपाल के जंगलों में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि चिंता की कोई विशेष बात नहीं है, फिर भी भारतीय बाघों की सुरक्षा के लिए नेपाल के वनाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
ग्रामीणों के लिए अलर्ट जारी
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क और कतर्निया के बीच लगभग 20 किलोमीटर का फासला है। बीच में विरल जंगल हैं, आबादी भी है। ऐसे में बाघों के लिए यह क्षेत्र संवेदनशील है।
नेपाल में विचरण कर रहे भारतीय बाघ कभी भी वापस लौट सकते हैं। ऐसे में खाता कारीडोर से सटे इलाकों के ग्रामीणों को भी अलर्ट रहने को कहा गया है।
नेपाल के अफसरों से संपर्क में हैं: डीएफओ
डीएफओ आशीष तिवारी ने भी पुष्टि की कि कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बाघ नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क पहुंच गए हैं।
उन्होंने कहा कि बाघों की टेरीटरी 15 से 20 किलोमीटर होती है। ऐसे में बाघों का नेपाल के जंगलों में जाना कोई बड़ी बात नहीं है, फिर भी भारतीय बाघों की सुरक्षा के लिए नेपाल के वनाधिकारियों से निरंतर संपर्क रखा जा रहा है।
इस तरह होती है बाघों की पहचान
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन का कहना है कि डेढ़ से दो साल के समय में कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बाघों का मूवमेंट तेजी से बढ़ा है। नार्थ खीरी का जंगल भी कतर्निया से सटा है।
नेपाल का राष्ट्रीय उद्यान तो खाता कारीडोर से जुड़ता ही है। ऐसे में बाघों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए नियमित कैमरा ट्रैपिंग की जरूरत है। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के माध्यम से पर्यावरण वन मंत्रालय को पत्र भी भेजा गया है।
धारियों से होती है बाघों की पहचान
नेपाल के राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की पहचान कैसे हुई, इस सवाल पर डीएफओ आशीष तिवारी और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी का कहना है कि बाघों की पहचान इनकी धारियों से होती है। प्रत्येक बाघ की धारियां अलग तरह की होती हैं। चेहरे की बनावट में भी बारीक अंतर होता है।