राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रिंसिपल के खाली पदों को भरने के लिए मानक बदले जाएंगे। इसके लिए प्रधानाचार्य भर्ती नियमावली में संशोधन की तैयारी है।
सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में लगातार तीन साल तक नौकरी करने वाले शिक्षक ही पात्र माने गए हैं। राज्य सरकार यह अनिवार्यता समाप्त करते हुए वित्तविहीन शिक्षकों को भी इसके लिए पात्र मानने जा रही है।
प्रदेश में मौजूदा समय 563 राजकीय इंटर कॉलेज और 1021 राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत खुले राजकीय हाईस्कूल हैं।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत खुलने वाले स्कूलों में प्रधानाचार्य के सभी पदों पर भर्ती होनी है। जीआईसी में भी करीब 175 पद खाली हैं।
जीआईसी प्रधानाचार्य के कुल पदों में 50 प्रतिशत सीधी भर्ती से तथा इतने ही पदों को पदोन्नति से भरने की व्यवस्था है।
सीधी भर्ती के लिए राजकीय व सहायता प्राप्त स्कूलों में तीन साल तक शिक्षक रहने वाले को ही पात्र माना गया है। इसके चलते प्रधानाचार्य के पदों पर भर्ती के लिए पात्र नहीं मिल पा रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा विभाग सरकारी और सहायता प्राप्त की अनिवार्यता समाप्त करते हुए इसके लिए वित्तविहीन शिक्षकों को भी पात्र मानने जा रहा है।
विभागीय स्तर पर हुई बैठक में सहमति बन गई है। कार्मिक और वित्त विभाग से मंजूरी लेने के बाद नियमावली संशोधन संबंधी प्रस्ताव कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।