अमौसी एयरपोर्ट पर जमीन अटकी होने से 300 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। रनवे के उत्तर व दक्षिण में एयरपोर्ट प्रशासन की 475 एकड़ जमीन है, जिन पर मेडिकल स्टेशन, विमानों के लिए पार्किंग स्टैंड, एप्रेन, फायर स्टेशन, सोलर पार्क बनाए जाने हैं।
चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट उत्तर भारत के बड़े एयरपोर्ट में शुमार है। यहां करीब 55 लाख यात्री सालाना सफर करते हैं। एयरपोर्ट के विस्तार की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में तीसरा टर्मिनल टी-थ्री बनाने का काम शुरू हो गया है पर, ऐसी कई योजनाएं हैं, जो जमीन नहीं मिलने से अटक गई हैं।
वह भी तब जब जमीन एयरपोर्ट प्रशासन के पास है, लेकिन उस पर विरोध-प्रदर्शन कर अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट रनवे के उत्तर में 300 और दक्षिण में 175 एकड़ जमीन है। इस जमीन के चारों ओर बाउंड्रीवॉल बनाई जानी है।
इसी जमीन पर एयरपोर्ट विस्तार की योजनाओं को उतारा जा रहा है। जैसे कि भक्तिखेड़ा में रडार लगाया गया है। अधिकारी बताते हैं कि यह जमीन लंबे समय तक खाली पड़ी रही, जिस पर लोगों ने खेती शुरू कर दी। अब जब एयरपोर्ट प्रशासन जमीन पर प्रोजेक्ट शुरू कर रही है तो लोग विरोध कर रहे हैं। इस बाबत राज्य सरकार व जिला प्रशासन से बातचीत भी चल रही है।
300 एकड़ जमीन रनवे के उत्तर में
प्रतीकात्मक तस्वीर
175 एकड़ जमीन रनवे के दक्षिण में
प्रशासन ने बताया कि रनवे के दक्षिण में एयरपोर्ट के पास 175 एकड़ जमीन है, जहां रहीमाबाद की ओर बाउंड्री बनाई जानी है। इसके अतिरिक्त इस जमीन पर आठ हवाईजहाजों के लिए एप्रेन की योजना भी अटकी है, जबकि कैटेगरी 9 का अपग्रेडेड फायर स्टेशन यहां बनाया जाना है। 20 जहाजों के लिए पार्किंग स्टैंड की योजना पाइपलाइन में है।
रनवे के उत्तर की तरफ 300 एकड़ जमीन एयरपोर्ट प्रशासन की है। इसकी घेराबंदी की जानी है। इस जमीन पर विमानों के लिए आठ पार्किंग स्टैंड का काम चल रहा है। कभी-कभार किसान परेशान करने लगते हैं। इसके अतिरिक्त यहां एक सोलर पार्क बनवाया जाएगा, जहां सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।
साथ ही साथ एक मेडिकल स्टेशन बनाया जाना है, ताकि यात्रियों को बड़े स्तर के इलाज यहीं मुहैया कराए जा सकें। फिलहाल मेडिकल की सुविधा के लिए टर्मिनल में व्यवस्था है।
कहीं दूर न शिफ्ट हो जाए एयरपोर्ट
70 एकड़ की दरकार पर होगा रनवे विस्तार
इस जमीन के अलावा एयरपोर्ट प्रशासन को राज्य सरकार से 70 एकड़ जमीन की और आवश्यकता है, जिसकी दरकार सरकार से की जा चुकी है। अधिकारियों की मानें तो अभी रनवे की लंबाई करीब 2700 मीटर है, जिसे बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3500 मीटर करने की योजना है। इस रनवे विस्तार के लिए जमीन का पेंच पिछले कई सालों से फंसा है। सरकार जमीन अधिगृहीत कर एयरपोर्ट प्रशासन को दे तो विस्तार हो सके।
राजधानी में डिफेंस एक्स्पो जैसा अंतरराष्ट्रीय इवेंट होने जा रहा है। निवेशकों की मीट हो चुकी है। ऐसे में बाहर से आने वाले वायुसेवाओं का ही इस्तेमाल करते हैं। अगर, एयरपोर्ट के प्रोजेक्टों को गति नहीं मिली तो कहीं ऐसा न हो जाए कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए जगह ही न बचे। एयरपोर्ट की ऑपरेशनल क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले समय में दिक्कतें बढ़नी तय मानी जा रही है
जल्द होगा समाधान
प्रतीकात्मक तस्वीर
विरोध प्रदर्शन से होती हैं समस्याएं
योजनाओं के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट का कद और बढ़ जाएगा। यह जमीन एयरपोर्ट की है। इस पर पार्किंग स्टैंड, फायर स्टेशन, मेडिकल स्टेशन, बाउंड्री वॉल वगैरह बनाया जाना है, लेकिन जब जमीन पर काम शुरू करवाया जाता है तो प्रदर्शन शुरू हो जाता है। इससे समस्याएं हो जाती हैं। - संजय नारायण, ओएसडी, अमौसी एयरपोर्ट
एयरपोर्ट के विकास की योजनाएं जिन गांवों की वजह से फंस रही थीं, उनका निस्तारण करवाया जा रहा है। जल्द ही यह समस्या हल हो जाएगी। इसके अलावा एयरपोर्ट प्रशासन को जमीन से लेकर अन्य कोई विवाद है तो उसे भी जिला प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर हल करवाएगा। - अभिषेक प्रकाश, जिलाधिकारी, लखनऊ