दिल्ली और एनसीआर में 10 रुपये के सिक्कों को लेकर फैले भ्रम और अफवाहों का असर लखनऊ में भी दिखने लगा है। राजधानी में भी दुकानदार 10 रुपये के सिक्के को नकली बताते हुए लेने से इन्कार कर रहे हैं।
जबकि इन सिक्कों की प्रमाणिकता को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पूर्व में ही सूचना जारी कर चुकी है। आरबीआई का कहना है कि 10 रुपये के सिक्के ‘इंडियन कॉइनेज एक्ट 1906’ के तहत तैयार कराए गए हैं और यह पूरी तरह से वैध हैं। सिक्कों को अस्वीकार करना कानूनन अपराध है।
प्रदेश के कई हिस्सों में अफवाहों की वजह से दुकानदार और व्यापारी इन सिक्कों को लेने से बचने लगे हैं। आरबीआई के एजीएम अजित प्रसाद के अनुसार, यह सिक्के पूरी तरह से वैध हैं।
आरबीआई लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिक्कों को लेकर फैली गफलत इन सिक्कों के प्रति पैदा हुआ आकर्षण है। दरअसल, 2009-10 में जब इन्हें पहली बार जारी किया गया तो लोगों को ये बेहद अनोखे लगे।
उन्होंने सैकड़ों और हजारों की संख्या में इन्हें इकट्ठा करना शुरू कर दिया। कई लोग इस गलतफहमी में रहे कि इन सिक्कों का मूल्य 10 रुपये से अधिक है और आने वाले समय में इन्हें इनकी धातु की वजह से ज्यादा कीमत में बेचा जा सकेगा।
इसकी वजह से बाजार में काफी कम संख्या में आए। अतिरिक्त मूल्य नहीं मिलने पर 2010 और 2011 में बने इन सिक्कों को एक साथ यूपी में निकाला गया है। एकाएक आए पुराने सिक्कों की वजह से दुकानदार और व्यापारी उलझन में हैं। वे इन्हें नकली मान रहे हैं। दूसरी ओर सोशल मीडिया और वॉट्सएप पर चल रहे मैसेजों ने भी इन्हें नकली साबित करने में योगदान दिया है।