आधार कार्ड बनाने में फर्जीवाड़े की शुरुआत लखनऊ से हुई थी। लखनऊ के तालकटोरा थानाक्षेत्र के राजाजीपुरम् में आधार कार्ड के फर्जी एनरोलमेंट सेंटर का पता चला तो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से तालकटोरा में एफआईआर दर्ज करा दी गई। वहीं, प्रदेश भर में अब तक एक हजार से अधिक एनरोलमेंट ऑपरेटर को ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है और संबंधित एजेंसी से ढाई करोड़ रुपये की वसूली भी की जा चुकी है।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश की पहले राजधानी में ही डमी फिंगर प्रिंट तैयार होती थी और अलग-अलग जिलों में भेजी जाती थीं। लखनऊ में पुलिस ने जांच तेज की तो इससे जुड़े लोग कानपुर के बर्रा में यही काम करने लगे। मामला जब एसटीएफ के साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ तो एसटीएफ ने कानपुर के बर्रा से दस लोगों को गिरफ्तार कर बड़ी संख्या में डमी फिंगर प्रिंट और आधार कार्ड से जुड़े तमाम दस्तावेज और उपकरण बरामद किए।
मालूम हो कि लखनऊ के तालकटोरा थाने में 17 जून को एफआईआर लिखाई गई थी। एफआईआर में बताया गया था कि आधार कार्ड एनरोलमेंट सेंटर को सत्यापन के दौरान पता चला कि विभिन्न जनपदों में आधार पंजीकरण में सॉफ्टवेयर के माध्यम से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जिसमें लखनऊ के राजाजीपुरम् के थाना तालकटोरा में राज कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत दुर्गेश सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
इसके बाद वहां से सभी कंप्यूटर और लैपटॉप को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया था, लेकिन पुलिस दुर्गेश तक नहीं पहुंच पाई थी। इस मामले में पुलिस ने दुर्गेश सिंह के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।