आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र गोकर्ण शुक्ला को पैरानॉइया (मानसिक उन्माद, विक्षिप्तता) का शिकार बताकर आयरलैंड के अस्पताल में एक महीने तक जबरन भर्ती रखा गया। अपने प्रोफेसर और ट्रिनिटी कॉलेज डब्लिन आयरलैंड के डॉ. स्टेफानो सांवितोस द्वारा बताए गए रिसर्च के विषय को लेकर सवाल खड़े करने पर गोकर्ण के साथ यह सुलूक किया गया।
गोकर्ण वहां से पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने गत 20 मार्च को आईआईटी कानपुर के ही छात्र रहे आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को फोन करके अपनी परेशानी बताई। इस पर ठाकुर ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मामले की जानकारी दी। तब जाकर गोकर्ण को छुड़ाया जा सका।
अमिताभ ठाकुर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि गोकर्ण ने उन्हें रविवार को फोन करके सूचना दी कि भारत सरकार और दूतावास के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अस्पताल से छोड़ दिया गया है। गोकर्ण ने बताया है कि वे फिजिक्स में टनलिंग मैग्नेटो रजिस्टेंस विषय पर रिसर्च करना चाहते थे।
इसमें जिरकोनियम, ऑक्साइड, कैल्शियम नाइट्राइड, एल्यूमिनियम नाइट्राइड जैसे तत्वों पर होने वाले असर का विश्लेषण किया जाता है, लेकिन उनके गाइड डॉ. स्टेफानो ने उन्हें जिस तरह का मॉडल दिया, वह फर्जी था और यह विज्ञान के क्षेत्र के साथ धोखा होता। उन्होंने इसका विरोध किया तो डॉ. स्टेफानो ने उन्हें पैरानॉइड घोषित कर दिया और अस्पताल में बंधकों की तरह रखवा दिया था।