इटंरसेप्टिंग ट्रंक ड्रेन के निर्माण का काम केके स्पन पाइप प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया, जिसकी कुल लागत 285.70 करोड़ रुपये थी। निविदा मूल्यांकन समिति ने निविदाओं का कोई तकनीकी मूल्यांकन नहीं किया और न ही इस बाबत रिपोर्ट तैयार की गई। यह फर्म वार्षिक कारोबार करने संबंधी तकनीकी योग्यता मानदंडों को भी पूरा नहीं करती थी। गलत ढंग से मेसर्स पटेल इंजीनियर्स का आवेदन खारिज कर दिया गया।
रबर डैम के निर्माण संबंधी 60.27 करोड़ की लागत का काम गैमन इंडिया को समाचार पत्रों में निविदा आमंत्रण प्रकाशित किए बिना दे दिया गया। गैमन इंडिया को नियम विरुद्ध ढंग से रबर मेम्ब्रेन आयात करने का ठेका दिया गया। इतना ही नहीं, उसे इस काम के लिए मनमाने ढंग से 18.84 करोड़ रुपये की जगह 29.24 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इससे सरकारी खजाने को 10.40 करोड़ रुपये की चपत लगी। यहां बता दें कि योगी सरकार ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित कमेटी से इस परियोजना की न्यायिक जांच कराई थी। उसमें भी कमोबेश यही अनियमितताएं बताई गई थीं।