सिंचाई विभाग में कर्मचारियों के चिकित्सा दावों की प्रतिपूर्ति (मेडिकल रिंबर्समेंट) में दोहरी नीति अपनाये जाने का मामला सामने आया है।
यहां अधिकारियों को तो निजी अस्पतालों में कराये गए इलाज का पैसा मिल रहा है जबकि कर्मचारियों के बिल लटकाये जा रहे हैं। कर्मचारी इस मामले को लेकर प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष अशोक कुमार ओझा के पास गए।
उन्होंने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में दोषी प्रशासनिक अधिकारी को भी हटा दिया गया है। कर्मचारियों के बिलों में यह आपत्ति लगाई जा रही है कि इलाज सरकारी अस्पताल में कराने पर ही मेडिकल बिल का पैसा मिलेगा।
जबकि अधिकारियों व चुनिंदा कर्मचारियों के निजी अस्पतालों के बिल आराम से पास किये जा रहे थे। जबकि, राज्य कर्मचारियों की नियमावली में साफ है कि कार्मिकों को तात्कालिक व आपात स्थितियों में कुछ शर्तों के साथ निजी चिकित्सालय में अपना इलाज करा सकते हैं।
इसके बावजूद सिंचाई विभाग में कर्मचारियों के बिल रोके गए। अनुसचिवीय अधिष्ठान संघ ने इस दोहरी नीति पर कड़ी नाराजगी जताई। प्रमुख अभियंता सिंचाई व विभागाध्यक्ष अशोक कुमार ओझा ने इस मामले में मुख्य अभियंता (अनुसंधान एवं नियोजन) एबी दीक्षित को जांच के निर्देश दिए हैं।
विभागाध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में एकरूपता लाई जाएगी। नियमानुसार जो भी सही होगा वह अधिकारियों व कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा। मामले में प्रशासनिक अधिकारी सहदेव वर्मा को हटा दिया गया है।