दीपावली पर आतिशबाजी और पटाखों से होने वाले किसी भी हादसे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चाक-चौबंद व्यवस्था कर ली है।
सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में इलाज के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि अगर कोई हादसे का शिकार हो जाए तो उसे तुरंत उचित इलाज मुहैया कराया जा सके।
सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि सिविल अस्पताल, बलरामपुर अस्पताल और गोमतीनगर स्थित लोहिया अस्पताल में किसी भी हादसे से निपटने के लिए अतिरिक्त बेड के साथ एक प्लास्टिक सर्जन को तैनात किया जाएगा।
अगर किसी स्थिति में बर्न का कोई मरीज आता है तो उसे बेहतर चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की विशेष टीम भी तैयार की गई है।
केजीएमयू और ट्रॉमा सेंटर में भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि सर्जिकल एवं आर्थो वार्ड में अतिरिक्त बेड का इंतजाम करने के साथ ही कुछ बेड रिजर्व रखे गए हैं।
बलरामपुर अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि दीपों को जलाते समय विशेष सावधानी बरतें। पटाखे और आतिशबाजी खुले स्थान पर ही करें जिससे किसी हादसे की आशंका न रहे।
जलने पर घाव को सिफ ठंडे पानी से धाएं
डॉक्टरों ने झुककर पटाखा अथवा आतिशबाजी न छुड़ाने की सलाह दी है। इससे किसी भी तरह के हादसे की स्थिति में आंखों की रोशनी जाने का खतरा सर्वाधिक होता है।
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके सिंह ने बताया कि जले स्थान पर लेप नहीं लगाना चाहिए। उसे रूई से नहीं ढकना चाहिए। इससे घाव में संक्रमण का खतरा बना रहता है।
कोई हादसा होने पर जख्म को सबसे पहले ठंडे पानी से धोना चाहिए। उन्होंने बताया कि पटाखे से जलने पर सबसे ज्यादा नुकसान त्वचा को होता है। बारूद भर जाने के कारण जले हुए स्थान की त्वचा ही खराब नहीं होती बल्कि बारूद से फैलने वाले जहर से आसपास की त्वचा भी खराब हो सकती है।
कंट्रोल रूम में करें फोन
किसी अनहोनी या दुर्घटना की आपातकालीन स्थिति में लोगों की मदद के लिए लोग सीएमओ के कंट्रोल रूम नंबर 0522- 222222 पर फोन कर सकते हैं। दीपावली के दिन इस कक्ष में 24 घंटे दो डॉक्टरों की ड्यूटी रहेगी।
जिससे किसी दुर्घटना की सूचना पर डॉक्टर तत्काल एंबुलेंस व दवाइयां लेकर मौके पर पहुंच सके। सीएमओ कार्यालय में मोबाइल एंबुलेंस की भी विशेष व्यवस्था रहेगी।