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शिक्षक दिवस पर भड़के अखिलेश के मंत्री, सम्मान के साथ दी नसीहत

Mon, 05 Sep 2016 09:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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शिक्षक दिवस पर इन्हें किया गया सम्मानित - फोटो : amar ujala
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शिक्षक दिवस पर सोमवार को आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षकों को सम्मान के साथ-साथ नसीहत भी दी गई। मंत्रियों व अफसरों ने उन्हें खूब खरी-खरी सुनाई। बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने कहा कि गरीब लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में बड़ी उम्मीदों से भेजते हैं। यदि आपने विश्वासघात किया तो ये कभी माफ नहीं करेंगे।
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माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि बच्चों के भविष्य की डोर आपके हाथ में है, चाहे तो आप उन्हें बना दो या मटियामेट कर दो। इस मौके पर बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के 26 शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

गन्ना संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने कहा, आज यहां मौका तो नहीं है कि शिक्षकों को खरी-खोटी सुनाई जाए। आप अच्छे शिक्षक हो इसलिए आपको सम्मान मिल रहा है। लेकिन शिक्षकों को यह सोचना चाहिए कि जितनी सुविधाएं उन्हें मिल रही हैं उसी के अनुरूप यदि काम करें तो प्रदेश नई ऊंचाइयों पर पहुंच जाएगा।
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शिक्षकों से समाज को बहुत उम्मीदें हैं। कहा कि पहले गुणवत्तायुक्त शिक्षा के मसले पर शिक्षकों की कमी का बहाना बनाया जाता था लेकिन अब सरकार ने 2.62 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की है। शीघ्र ही और शिक्षक नियुक्त हो जाएंगे। इसलिए अब शिक्षकों को भी पढ़ाना होगा।

'डर से ही आता है अनुशासन'

राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने कहा, शिक्षक दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाना चाहिए। यह समारोह थाने, चौकी, तहसील व जिलों में होना चाहिए। अनुशासन भी डर से ही आता है। मैं अपनी बिना पढ़ी-लिखी मां से डरता था लेकिन आज के बच्चे अपनी मां को ही चिढ़ाने से नहीं चूकते।

उन्होंने शिक्षकों से कहा, आपसे बढ़कर कोई दूसरा समाजवादी नहीं है क्योंकि आप अमीर गरीब, जाति-धर्म का ध्यान दिए बिना बच्चों पर ज्ञान की गंगा बहाते हो।

निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर चिंता जताई। कहा कि आज कक्षा पांच के बच्चों को कक्षा दो व तीन का भी कुछ नहीं आता है। वे लोग भी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ कर इस ऊंचाई तक पहुंचे हैं लेकिन आज स्थिति बहुत खराब है। शिक्षकों को जितनी सुविधाएं दी जा रही हैं उस लिहाज से बच्चों को रिजल्ट नहीं मिल रहा है।

निदेशक साक्षरता एवं वैकल्पिक ऊर्जा अवध नरेश शर्मा ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या पर चिंता जताई। कहा, तमाम सुविधाएं देने के बावजूद विद्यालयों में पुरानी गरिमा नहीं लौट रही है। इस मौके पर बेसिक शिक्षा के सलाहकार प्रकाश राय ऊर्फ लल्लन राय, प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेन्द्र कुमार, सचिव बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

सीबीएसई की ओर क्यों भाग रहे हम

- फोटो : amar ujala
माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव ने कहा, एक समय था कि यूपी बोर्ड की अपनी गरिमा थी लेकिन आज सभी सीबीएसई बोर्ड की ओर भाग रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों है,  इस पर भी चिंतन करना होगा। अपने बोर्ड का स्तर सुधारने की दिशा में काम करना होगा।

प्रश्नपत्रों में भी बदलाव की जरूरत
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने कहा, उन्होंने पिछले 10 वर्षों के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रश्नपत्रों का अध्ययन किया है। इसमें इस तरह के प्रश्न पूछे जा रहे हैं ताकि छात्र सीधे रटकर उत्तर लिख दे।

उसे इस तरह पढ़ाया जा रहा है कि वह अपना दिमाग लगाने के बजाय रटकर पास हो जाए। ऐसी शिक्षा का क्या फायदा? इससे तो यहां केछात्र दोयम दर्जे के इंजीनियरिंग कॉलेजों से इंजीनियर व एमबीए कर नौकरी के लिए भटकेंगे। बाद में बीटीसी करने आ जाएंगे।

नौकरी तो सरकारी लेकिन बच्चों की पढ़ाई प्राइवेट में

प्रमुख सचिव माध्यमिक व उच्च शिक्षा जितेन्द्र कुमार ने कहा, आज समाज में सभी लोग नौकरी तो सरकारी करना चाहते हैं लेकिन बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं।

सरकारी स्कूलों में स्थिति यह है कि लोग बच्चों का नामांकन करा लेते हैं, किताबें व यूनिफार्म ले ली जाती हैं, मिड-डे मील का भी फायदा लिया जाता है लेकिन इन स्कूलों में बच्चे नहीं आते।

मेधावी छात्र-छात्राओं को मिला पंचानन राय पुरस्कार
कार्यक्रम में हाईस्कूल व इंटर के पांच मेधावी छात्र-छात्राओं को पंचानन राय स्मृति पुरस्कार दिया गया। इनमें हाईस्कूल की सौम्या पटेल व अनुपम सिंह के अलावा इंटर की साक्षी वर्मा, अभय बंसल व हिमांशु प्रताप सिंह शामिल हैं। इन्हें 10-10 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र दिया गया।

इन शिक्षकों को मिला पुरस्कार
माध्यमिक शिक्षा
राजेश कुमार सिंह तोमर, लखनऊ
हर प्रसाद यादव, मैनपुरी
डॉ. ब्रज भूषण बंसल, मेरठ
सुरेन्द्र नाथ विश्वकर्मा, गोरखपुर

डॉ. दिनेश चन्द्र, एटा
स्नेहलता सिंह, मेरठ
डॉ. कुदशिया अंजुम, सहारनपुर
रेखा रानी शर्मा, मेरठ
जय प्रकाश ओझा, गोरखपुर
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इन्हें भी किया गया सम्मानित (बेसिक शिक्षा)

राजेश्वरी देवी, बिजनौर
लक्ष्मीदेवी शर्मा, पीलीभीत
जय प्रकाश पांडेय, फैजाबाद
चन्द्रभान, चंदौली

अखिलेश कुमार, भदोही
जफर अख्तर, कानपुर देहात
गंगाराम, पीलीभीत
सादिक अली, गोरखपुर
मो. यामीन, शामली
राजकिशोर, बरेली

नन्दू प्रसाद गुप्ता, गोरखपुर
ध्रुवपति यादव, बस्ती
संतोष कुमार, एटा
सुरेश सिंह यादव, कन्नौज

विजय कुमार मिश्र, रायबरेली
श्याम सिंह, बिजनौर
मंजू शर्मा, मेरठ
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