वर्ष 2015 में 372 एकड़ के लिए लाइसेंस लेने वाली शिप्रा एस्टेट सुल्तानपुर रोड पर विकसित की जा रही है। इसके लिए अभी तक केवल 130 एकड़ जमीन ही बिल्डर कंपनी के पास है। वहीं, इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लाइसेंस की अवधि बढ़ने के बाद भी संशोधित डीपीआर एलडीए के अनुमोदन के लिए नहीं दी जा सकी है।
नोटिफाई कर आरक्षित कराईं जमीनें
एलडीए और आवास विकास परिषद को शहर के पास जमीनें नहीं मिल रही हैं। ऐसे में इन्हें शहर से 15 किमी दूर तक भविष्य की योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है। वहीं, निजी बिल्डर कंपनियों ने शहर के पास हाईटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम पर जमीनें आरक्षित कराई हुई हैं। इससे जरूरतमंदों को आशियाना बनाने के लिए भूखंड भी नहीं मिल पा रहे हैं।
एकड़ स्कीम में कागजों पर बिके भूखंड
रेरा के सामने आई शिकायतों को देखें तो इनमें से अधिकतर बिल्डरों ने बिना विकास कार्य और एलडीए से अनुमोदन डीपीआर पर लिए ही एकड़ स्कीम के नाम पर कागजों पर ही भूखंड बेच दिए। ऐसे में कई साल बाद भी खरीदार कब्जा नहीं पा सके हैं। सालों से ऐसे खरीदार बिल्डरों के फ्रॉड की वजह से रेरा और एलडीए के चक्कर काटने को मजबूर हैं।