शहीद पथ पर हो रही दुर्घटनाओं की वजह से लोग सुरक्षा और जीवन के गंभीर खतरों का सामना कर रहे हैं, जबकि जनता से हितों से जुड़े महकमे और निकाय सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों को एक दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं।
इस अनिर्णय की स्थिति पर विराम लगना चाहिए और एक एजेंसी के संबंध में ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए, जो सालाना बिजली और रखरखाव शुल्क समेत विद्युतीकरण का खर्च उठाए।
मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने यह टिप्पणी शहीद पथ पर आए दिन हो रहीं दुर्घटनाओं से लोगों की हिफाजत की गुजारिश वाली पीआईएल पर दिए गए आदेश में की है।
साथ ही सूबे के मुख्य सचिव, एडीजीपी (यातायात) एसपी (ट्रैफिक) और एनएचएआई को कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई), नगर निगम, एलडीए हाउसिंग बोर्ड, मंडलायुक्त समेत अन्य एजेंसियों की बैठक बुलाने को कहा है।
जिससे इस समस्या का तुरंत हल तलाशा जा सके। कोर्ट ने कहा कि शहीदपथ के विद्युतीकरण का काम अनिश्चित रूप से अनिर्णय की स्थिति में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
इसके लिए मुख्य सचिव जरूरी निर्देशों को जारी किया जाना सुनिश्चित करा सकते हैं। अदालत ने एनएचएआई को भी निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव के समक्ष मीटिंग के दौरान सभी संबंधित मूल रिकार्ड पेश करें।
जिससे निर्णय लिया जा सके। कोर्ट ने अपेक्षा की है कि मामले की अगली सुनवाई की तारीख (21 अगस्त) के पहले विस्तृत निर्णय ले लिया जाएगा और जल्द ही काम शुरू हो जाएगा।
अदालत ने सभी जन प्राधिकारियों को चेताया है कि कोर्ट के समक्ष किए गए कमिटमेंट पूरा करने के प्रति उन्हें जवाबदेह माना जाएगा।
कोर्ट ने एनएचएआई को उसके द्वारा हलफनामा देकर एक अगस्त से काम शुरू करने का कमिटमेंट पूरा करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने इस बीच सभी संबंधित प्राधिकारियों को तुरंत ऐसे जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं।
जिससे निर्माण पूरा होने तक सुरक्षा को खतरा पैदा न हो। अदालत ने एडीजी पुलिस (यातायात) समेत लखनऊ के एसपी (यातायात) को पूर्व के निर्देश के तहत शहीद पथ की 24 घंटे पेट्रोलिंग के पालन की निगरानी करने को कहा।
अदालत ने कहा कि सिपाही व अन्य पुलिस स्टाफ अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से कर रहे हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए वहां औचक निरीक्षण किए जाएं।
कोर्ट ने एडीजीपी (यातायात) को निर्देश दिया कि इस बीच अमल में लाई कार्रवाई संबंधी हलफनामा 21 अगस्त को पेश करें। इससे पहले एनएचएआई द्वारा हलफनामा पेशकर की गई कार्रवाई व प्रस्ताव का ब्योरा कोर्ट में पेश किया गया।
अधिवक्ता ने 2013 में पीआईएल दायर कर फैजाबाद रोड से कानपुर रोड को जोड़ने वाली करीब 25 किलोमीटर लंबे शहीद पथ पर खराब स्ट्रीट लाइटों और अवैध कटों की वजह से आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया था।
इस मामले में पहले भी कोर्ट ने आदेश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी काम शुरू नहीं हो सका। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।