हाईकोर्ट ने जमीनों और संपत्तियों के सर्किल रेट बढ़ाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने लखनऊ के डीएम के एक आदेश को न सिर्फ रद्द कर दिया बल्कि इसे गैरकानूनी व प्रभावहीन करार दिया है। यह आदेश छह अगस्त 2003 को तत्कालीन डीएम नवनीत सहगल ने जारी किया था।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सूबे में जिलाधिकारियों ने कानूनी व्यवस्था का संज्ञान लिए बगैर यांत्रिक रूप से सर्किल रेट बदल दिए। यह तर्क संगत नहीं है। अदालत ने आदेश दिया कि तत्काल प्रभाव से सर्किल रेट रिवाइज न किया जाए। यदि बहुत जरूरी हो तो इस फैसले की टिप्पणियों को ध्यान में रखा जाए।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने सोमवार को यह फैसला प्रवीण कुमार जैन की रिट मंजूर कर सुनाया। इसमें 11 साल पहले के उक्त आदेश को मनमाना बताते हुए इसकी वैधता को चुनौती दी थी। इसमें कहा गया था कि इस प्रक्रिया में कानून का पालन नहीं किया गया था इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।