हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रॉबर्ट वाड्रा को डीएलएफ जमीन के मामले में बड़ी राहत देते हुए जनहित याचिका खारिज कर दी है।
यह याचिका लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ती नूतन ठाकुर ने दायर की थी। वाड्रा और डीएलएफ रियल स्टेट कंपनी के बीच गुडगांव में गैर कानूनी ढंग से लैंड डील हुई थी।
इस दौरान वाड्रा को 7.59 करोड़ का फायदा हुआ। इसका खुलासा तब हुआ जब तत्कालीन चकबंदी आयुक्त अशोक खेमका ने इसकी जांच की।
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उन्होंने इस म्यूटेशन को ही खारिज कर दिया और जांच में पाया कि डीएलएफ और वाड्रा के बीच जो लैंड ट्रांजेक्शन हुआ है वह गैर कानूनी है और इसके लिए कई नियमों का उल्लंघन किया गया है।
इतना ही नहीं उन्होंने यह भी पाया कि कुछ अधिकारियों ने वाड्रा को मदद भी पहुंचाई है। इस मसले पर बीजेपी और अरविंद केजरीवाल ने भी जांच कराने की मांग की थी।
नूतन ठाकुर ने इसी मक्सद से कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की अपील की थी। सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख मुकर्रर की गई थी।