हाईकोर्ट के कर्मचारियों को भी संजय गांधी पीजीआई में नि:शुल्क इलाज की सुविधा मिलने लगी।
कोर्ट की फटकार के बाद कैंसर से पीड़ित एक कर्मचारी को इलाज मुहैया कराया गया। सरकार ने हाईकोर्ट के कर्मचारियों को फ्री इलाज उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये रिवाल्विंग फंड में जमा किया था।
इसके बावजूद कर्मचारियों को इलाज नहीं मिल रहा था। शुक्रवार को निदेशक पीजीआई और हाईकोर्ट के महानिबंधक बीच लिखित करार होने के बाद ये सुविधा शुरू हो गई।
उच्च न्यायालय कर्मचारी अधिकारी संघ के महासचिव ओमप्रकाश ने बताया कि 2009 में सचिवालय कर्मियों को एसजीपीजीआई में मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया करायी थी।
लेकिन उच्च न्यायालय के कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिली थी। संघ 2011 से इस सुविधा की मांग न्यायालय प्रशासन के माध्यम से कर रहा था। इसके बावजूद सरकार ने नकारात्मक रुख अपनाए रखा।
सरकार की कार्रवाई से निराश संघ ने 2012 में लखनऊ पीठ में एक याचिका दायर की थी। इसी के बाद मार्च 2013 में सरकार ने एक करोड़ रुपये रिवाल्विंग फंड के रूप में पीजीआई को दिए थे।
इसके बावजूद कर्मचारियों और अधिकारियों को इलाज नहीं मिल रहा था। लखनऊ पीठ के एक कर्मचारी विजय कुमार एप्लास्टिक एनीमिया (ब्लड कैंसर) से जूझ रहा था लेकिन उसे भी पीजीआई में नि:शुल्क इलाज नहीं मिल रहा था।
इस बारे में संघ ने मुख्य न्यायाधीश को जानकारी दी। इसी के बाद महानिबंधक प्रतुष कुमार और वरिष्ठ निबंधक आलोक कुमार मुखर्जी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेकर कर्मचारियों के इलाज की सुविधा शुरू करायी।
कर्मचारी विजय कुमार इस सुविधा का पहले लाभार्थी हैं। ओमप्रकाश ने संघ की ओर से मुख्य न्यायाधीश डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, महानिबंधक, वरिष्ठ निबंधक और याचिका करने वाले वकील अमरेंद्र बाजपेई को धन्यवाद दिया है।