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चुनाव बाद अखिलेश देंगे बिजली का ‘झटका’

Sun, 09 Mar 2014 02:17 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश के उपभोक्ताओं को लोकसभा चुनाव के बाद बिजली दरों का ‘झटका’ लग सकता है।
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लोकसभा चुनाव की घोषणा के चलते नई बिजली दरों का मामला फिलहाल मई तक टल गया है।

हालांकि आयोग दरों के निर्धारण को लेकर माथा-पच्ची में जुटा है और इस संबंध में पावर कॉर्पोरेशन से लगातार जरूरी सूचनाएं व आंकड़े भी तलब किए जा रहे हैं लेकिन टैरिफ आर्डर मई में चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

गांवों और किसानों को छोड़कर सभी श्रेणियों में थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
इस बार पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने नियामक आयोग के समक्ष वर्ष 2014-15 का वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) और टैरिफ प्रस्ताव वक्त पर दाखिल कर दिया था ताकि नई बिजली दरें 1 अप्रैल 2014 से लागू हो सकें।
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केंद्र सरकार की वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) की शर्तों में भी 1 अप्रैल से नई दरों को लागू किया जाना शामिल है।

इसलिए कॉर्पोरेशन चाहता था कि मार्च के दूसरे सप्ताह तक आयोग टैरिफ आर्डर जारी कर दे जिससे 1 अप्रैल से नई दरें प्रभावी हो जाएं।

लेकिन 5 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ आचार संहिता लागू हो जाने से कॉर्पोरेशन की उम्मीदों पर पानी फिर गया। अब नई दरें जून से ही लागू हो पाने की संभावना है।

टैरिफ आर्डर में देरी से जहां पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी राजस्व के नुकसान को लेकर परेशान हैं वहीं सरकार के लिए राहत की बात यह है कि चुनाव से पहले दरों में बढ़ोतरी को लेकर उसे जनता की नाराजगी नहीं झेलनी पड़ेगी।

सूत्रों का कहना है कि एफआरपी की शर्तों को देखते हुए सभी श्रेणियों की बिजली दरों में थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी तय है। कॉर्पोरेशन ने कुल मिलाकर 10 फीसदी की वृद्धि प्रस्तावित की है।

विद्युत नियामक आयोग ने अपने कंसल्टेंट के जरिये एआआर व टैरिफ आर्डर का परीक्षण शुरू कराकर दरों के निर्धारण की कार्यवाही शुरू कर दी है।
पावर कॉर्पोरेशन से राजस्व वसूली और खर्र्चों को लेकर कुछ अतिरिक्त जानकारियां तथा निजी कंपनियों से खरीदी जाने वाली बिजली के औचित्य के बारे में पूछा गया है।
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आयोग के अधिकारियों का कहना है कि चूंकि आचार संहिता लग गई है इसलिए दरों के निर्धारण की प्रक्रिया धीमी हो गई है।

आयोग के चेयरमैन देश दीपक वर्मा का कहना है कि एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव पर आयोग अपना काम कर रहा है। चुनाव के बीच में दरों की घोषणा नहीं की जा सकती इसलिए अब चुनाव बाद ही टैरिफ आर्डर जारी किया जाएगा।
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