राजधानी में अवैध निर्माणों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एलडीए से साफ-साफ पूछा है कि वह यह बताए कि अवैध निर्माणों को कैसे रोकेगा। इसके क्या कानूनी प्रावधान हैं। एलडीए को शुक्रवार को इसका जवाब देना होगा।
न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को संदीप सक्सेना के एक प्लॉट के मामले में लंबित याचिका पर यह आदेश दिया। याची के वकील प्रशांत सिंह अटल के मुताबिक कोर्ट ने एलडीए से पूछा है कि अवैध रूप से जो भवन बन चुके हैं उन पर कार्रवाई कैसे की जाएगी।
भविष्य में अनधिकृत निर्माण कैसे रोका जाएगा। कोर्ट ने इससे संबंधित नियमों-कानूनों की पूरी जानकारी एलडीए से मांगी है। इस पर सुनवाई 12 दिसंबर को होगी। एलडीए की ओर से अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया कि अब तक शहर में 1596 अवैध निर्माण चिह्नित किए जा चुके हैं।
इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बाकी बचे अवैध निर्माणों को 31 दिसंबर तक चिन्हित कर लिया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूछने पर राज्य सरकार की अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने बताया कि 15 दिसंबर तक एलडीए के नए उपाध्यक्ष (वीसी) की तैनाती की जा सकती है।
इस मामले में नपेंगे 100 से अधिक इंजीनियर
हाईकोर्ट ने गोमती नगर विस्तार में अवैध निर्माण पर प्राधिकरण से इसका ब्यौरा और इसके जिम्मेदार इंजीनियरों की सूची मांगी है। कोर्ट की सख्ती को देखते हुए एलडीए उपाध्यक्ष ने नोटिस जारी कर 31 दिसंबर तक पूरा ब्यौरा मांगा है।
नए और पुराने मिलाकर ऐसे अभियंताओं की संख्या 100 के करीब है। कोर्ट ने गोमती नगर विस्तार में अवैध निर्माण पर संदीप सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अवैध निर्माण के चलते वादी को अपने प्लॉट पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है।
इसको पूरे शहर के अवैध निर्माण से जोड़ कर हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के अधिकारियों से सभी अवैध निर्माणों की सूची और उसको कराने के लिए जिम्मेदार माने गए अभियंताओं की भी सूची तलब की है। पिछले डेढ़ माह से एलडीए अफसर जवाब देने से कतरा रहे हैं।
इस वजह से सुनवाई लगातार टलती जा रही है। प्राधिकरण के अधिकारियों पर न्यायालय की अवमानना का वाद बनता नजर आ रहा है। इस पर कार्यवाहक उपाध्यक्ष ने अब सख्त रुख अपनाया है।
इंजीनियरों को अब रोज भरनी होगी एक्शन रिपोर्ट
अब सभी अधिशासी अभियंताओं को रोज अपने-अपने इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई की एक्शन रिपोर्ट देनी होगी। इसे खुद प्रमाणित भी करना होगा, ताकि बाद में वे अपनी बात से मुकर न सकें।
प्राधिकरण की कार्यवाहक सचिव, अपर सचिव सीमा सिंह को आदेश दिया गया है कि वे एक प्रारूप बनाकर रोजाना के आधार पर समीक्षा करें और सूचनाएं उपलब्ध कराएं। मुख्य अभियंता ओपी मिश्र को कामों की लगातार देखरेख करने के अलावा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
एलडीए के कार्यवाहक उपाध्यक्ष राजशेखर ने बताया कि अफसर 30 अक्तूबर से प्रकरण को टाल रहे हैं। न तो अवैध निर्माणों की पूरी सूची उपलब्ध करवा रहे हैं और न ही जिम्मेदार अभियंताओं के नाम बताए जा रहे हैं। अगर 31 दिसंबर तक पूरी सूची मुझे नहीं उपलब्ध करवाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।