उत्तर प्रदेश महिलाओं के लिए किस कदर असुरक्षित बन चुका है, इसका अंदाजा इससे ही लग जाता है कि सूबे में छह महीने में रेप की 1689 वारदातें हुईं।
भाजपा ने कहा कि पिछले दो सालों के सपा सरकार के शासनकाल में उत्तर प्रदेश महिला अत्याचारों का झंडाबरदार प्रदेश बनकर उभरा है।
पिछले छह माह में राष्ट्रीय महिला आयोग को देशभर से महिलाओं के खिलाफ अपराध की कुल 3,868 शिकायतें मिलीं है, जिनमें सर्वाधिक 2,079 शिकायतें यूपी से हैं।
एसिड अटैक से लेकर बलात्कार तक
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चन्द्र मोहन ने कहा कि आयोग को यूपी से महिलाओं पर एसिड अटैक की 12 शिकायतें, हत्या के प्रयास की 42, बलात्कार की कोशिश की 206, जाति या समुदाय आधारित हिंसा की 123, घरेलू हिंसा की 1,316 और बलात्कार की 380 शिकायतें मिली हैं।
महिला आयोग की रिपोर्ट के अलावा स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े तो यूपी में महिला अत्याचारों की और भी भयावह रिपोर्ट पेश करते हैं।
दहेज हत्या भी कम नहीं
डॉ. मोहन ने कहा कि जून में खत्म हुई पहली छमाही की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में रेप के कुल 1689 मामले, दहेज हत्या के 1243 मामले, छेड़खानी के 381 और शील भंग के 3778 मामले सामने आ चुके हैं।
सपा राज में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं रह गई हैं। सीआइडी में महिला शाखा, हर जिले में महिला थाना और एक खास महिला सेल की स्थापना करने की घोषणा के बावजूद महिलाओं पर अत्याचार नहीं रुके हैं।
महिलाओं को गुमराह कर रही सरकार
उन्होंने कहा कि अब वूमेन पॉवर लाइन -1090 का हर जिले में विस्तार करने की घोषणा कर सपा सरकार केवल महिलाओं को गुमराह करना चाहती है।
गौरतलब है कि बदायूं रेप कांड और मोहनलालगंज रेप कांड की घटना के कारण प्रदेश सरकार को सर्वाधिक किरकिरी का सामना करना पड़ा है।
वहीं भाजपा और अन्य विपक्षी दल सरकार पर जमकर निशाना साध रहे हैं।